निकायों में राजस्व निरीक्षक के सभी रिक्त पदों पर सीधी भर्ती में कई पेंच हैं।
राज्य सरकार की व्यवस्था है कि कुल रिक्त पदों में आधी पदोन्नति व आधी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे।
ऐसे में नगर विकास विभाग की यह तैयारी की राजस्व निरीक्षक के सभी रिक्त 450 पदों को सीधी भर्ती से भर लिया जाए, आगे चलकर परेशानी का सबब बनना तय है।
उत्तर प्रदेश में 630 निकाय हैं। इसमें 13 नगर निगम, 194 पालिका परिषद व 423 नगर पंचायतें हैं।
उत्तर प्रदेश महापालिका सेवा आदेश 1963 में दी गई व्यवस्था के मुताबिक राजस्व निरीक्षक, कर संचायक और मोहर्रिर के पदों की व्यवस्था की गई।
इसमें राजस्व निरीक्षक के 25 फीसदी पदों पर पदोन्नति देने की व्यवस्था थी।
राज्य सरकार ने 3 मई 1983 को राजस्व निरीक्षक के पद को केंद्रीयत सेवा का पद मान लिया गया, लेकिन अधिनस्थ यानी नीचे के दोनों पदों पर कोई निर्णय नहीं किया गया। इसके चलते कर संचायक और मोहर्रिर की राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति रुक गई।
निकायों में इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों ने राज्य सरकार से अनुरोध किया। इसके आधार पर यह सहमति बनी कि अकेंद्रीय सेवा के इन कर्मचारियों को राजस्व निरीक्षक के कुल रिक्त पदों में 50 फीसदी पदों पर पदोन्नति दी जाएगी।
इसके आधार पर इसी साल आदेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इस बीच नगर विकास विभाग ने राजस्व निरीक्षक के सभी रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसका विरोध शुरू हो गया है। निकायों में कर संचयन विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने कहा है कि इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।