जब मोदी के दाहिना हाथ माने जाने वाले अमित शाह को यूपी में भाजपा के कायाकल्प की जिम्मेदारी सौंपी गई, तो भाजपा नेतृत्व बुरी तरह बिखरा हुआ था।
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2009 में हासिल की गईं 10 सीटों का आंकड़ा भी पार कर पाना चांद की चाहत करने जैसा था। लेकिन, अमित शाह ने एक ऐसी टीम बनाई जिसने यूपी में नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाया।
न सिर्फ इस टीम ने भाजपा की सूरत बदली, 71 सीट जिताकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बना डाला। कौन हैं भाजपा के ख्वाब को पूरा करने वाले अमित शाह के ये सात सिपाही, जानिए आगे...
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बंसलः संघ के इस योद्धा ने सजाई रणभूमि
सुनील बंसल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठन के सह राष्ट्रीय सचिव बंसल मूलतः राजस्थान से आते हैं। उन्हें शाह के साथ उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
यूपी में जगह-जगह प्रचार करने से लेकर योजनाएं तैयार कर उन्हें सटीक अंदाज में लागू करने तक बसंल ने अमित शाह के आदेशों का अक्षरशः पालन किया।
बसंल के पास न सिर्फ भाजपा के दिग्गज नेताओं की जरूरत के अनुसार उनके कार्यक्रम तय करने की जिम्मेदारी थी, बल्कि वही तय कर रहे थे कहां किस नेता की रैली या सभा जरूरी है।
बंसल ने जयपुर, मुंबई और नई दिल्ली से 20 युवाओं की एक टीम तैयार की। यह टीम अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं की जानकार थी और इसने बसंल की रणनीति को जमीन पर उतारकर सटीक आकार देने का काम किया।
रत्नाकरः सूबे में दौड़ाए 400 मोदी रथ
रत्नाकरः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ही इस अनुभवी कार्यकर्ता को बसंल की मदद करने के लिए उतारा गया।
बसंल और रत्नाकर दोनों ही लोगों को प्रचार अभियान में जुटे अन्य संगठनों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
400 मोबाइल मोदी रथों को यूपी के दूरदराज के गांवों में भेजकर मोदी लहर बनाने की जिम्मेदारी भी रत्नाकर ही बसंल के साथ मिलकर सकुशल निभाई।
लक्ष्मीकांत: निभाई असली चीफ की भूमिका
लक्ष्मीकांत बाजपेयी : यूपी भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ही अमित शाह की योजनाओं को अपनी विशाल टीम के साथ सूबे भर में लागू करवाते गए।
अपने तेवर और मेहनती कार्यशैली के लिए भाजपा के दिग्गजों में अच्छी पहचान रखने वाले बाजपेयी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव अभियान के दौरान ऊर्जावान बनाए रखने में अहम भूमिका अदा की।
मोदी की रैलियों को सफल बनाने के लिए बापजेयी तीन-चार दिन पहले ही उन जगहों पर पहुंचते रहे और भारी भीड़ जुटाने का बीड़ा खुद उठाते रहे। इसमें उन्हें कामयाबी भी हासिल हुई।
वास्तव में, वाराणसी और अमेठी जैसी दो सबसे अहम सीटों के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी भी खुद बाजपेयी ने बंसल के साथ मिलकर उठाई और दोनों ही जगह इतिहास रचा डाला।
इन दोनों ने किया जमीनी काम
स्वतंत्र देव सिंहः उत्तर प्रदेश में भाजपा के महासचिव और लक्ष्मीकांत बाजपेयी के खास सिंह अमित शाह की टीम के भी अहम सदस्य बने रहे।
सिंह को यूपी की पांच अहम लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी भी दी गई। उन्होंने न सिर्फ वहां की कमियां पता लगाईं, बल्कि उन्हें दूर करने की भी पूरी कोशिश की।
शिव प्रताप शुक्लाः उत्तर प्रदेश में भाजपा के उपाध्यक्ष शुक्ला के अनुभव का इस्तेमाल अमित शाह ने बखूबी किया। उन्हें जगह-जगह भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करने का काम सौंपा गया, ताकि कहीं कोई कसर न रह जाए।
शुक्ला को तमाम जगहों पर मोदी की रैली की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
महेंद्र सिंह: भाजपा से विधान परिषद सदस्य सिंह अमित शाह के निर्देश पर बंसद की चुनावी योजना में उनका साथ दिया और कई लोकसभा सीटों पर जाकर पार्टी को हालात से रू-ब-रू कराने का काम किया।
भाजपा के गढ़ लखनऊ और सटे हुए मोहनलालगंज लोकसभा सीट में चुनाव अभियान की जिम्मेदारी भी महेंद्र सिंह को ही सौंपी गई।
सिंह के अलावा, भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रमोहन सिंह को भी अमित शाह की टीम में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई, जो उन्होंने बखूबी निभाई।