होटल रेनेसां के एग्जीक्यूटिव नमन वर्मा को मुनीर ने .32 बोर की जिस रिवॉल्वर से गोलियां मारी थीं, वह सवा दो साल पहले अलीगढ़ के पीडब्ल्यूडी ठेकेदार मंदीप से लूटी गई थी। मंदीप ने क्वारसी थाने में इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बृहस्पतिवार दोपहर गोमतीनगर स्थित एसटीएफ मुख्यालय में नमन हत्याकांड के खुलासे की प्रेस कांफ्रेंस में आईजी एसटीएफ राम कुमार ने यह जानकारी दी।
एसटीएफ अधिकारियों ने इस बात को भी स्वीकारा कि अगर मुनीर एनआईए अफसर तंजील अहमद की निर्मम हत्या न करता तो शायद राजधानी का नमन वर्मा हत्याकांड पहेली बनकर रह जाता। एएसपी अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि मुनीर ने 2013 में अपराध शुरू किया था।
वह सनकी मानसिकता का है। अपने शिकार को गोली मारने में जरा भी नहीं सोचता। जब उसने तंजील की हत्या की, तब पुलिस का ध्यान गया। मुनीर ने गिरफ्तारी के बाद खुद कहा था कि तंजील की हत्या इतनी हाईप्रोफाइल हो जाएगी, उसने सोचा भी नहीं था।
एसटीएफ के एसएसपी ने कहा कि तंजील को मारने के बाद मुनीर को पता था कि पुलिस उसे छोड़ेगी नहीं। यही वजह थी कि वह और दुस्साहसिक हो गया था।
एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि आदिलनगर स्थित किराये के मकान में मुनीर और उसके साथी ठहरे थे, उसका मकान मालिक आईडी प्रूफ मांग रहा था।
इसलिए अपराधियों ने कमरा ही छोड़ दिया। पुलिस ने उक्त मकान पर जाकर मकान मालिक से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि मुनीर और उसके साथ तीन-चार लड़के यहां सिर्फ सात दिन के लिए ही रहे। उनकी गतिविधियां संदिग्ध थीं।
18 नवंबर की रात नमन वर्मा होटल से घर जाते वक्त धीरे-धीरे बाइक चलाते हुए अपनी होने वाली पत्नी से मोबाइल फोन पर बातचीत कर रहा था। मधुरिमा रेस्टोरेंट के सामने पुल के ऊपर सुनसान स्थान पर मुनीर और सऊद ने नमन की बाइक को ओवरटेक कर रोक लिया।
मुनीर ने रिवॉल्वर निकालकर नमन के पैर की तरफ फायर करते हुए उतरने को कहा। नमन ने बाद में कॉल करने की बात कहते हुए मोबाइल फोन अपनी जेब में डाल लिया। मुनीर ने बाइक छीनने की कोशिश की तो नमन ने उसका हाथ पकड़ लिया। इससे गुस्साए मुनीर ने नमन के पेट में गोली मार दी। नमन जमीन पर गिरा तो एक गोली और मारी। इसके बाद वह बाइक लेकर पॉलीटेक्निक की तरफ भाग निकला।