गोरखपुर में बदमाशों के रुकने का पता चला तो पुलिस ने घेराबंदी कर तीन शातिरों को दबोच लिया। अधिकारियों का नाम लेकर ठगी करने वाले शातिरों की गिरफ्तारी की जानकारी पाकर गोमतीनगर पुलिस ने भी आरोपियों से पूछताछ की। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनकर जेटीआरआई के अधिकारियों से दस लाख रुपया मांगने की बात भी कुबूली।
उक्त मामले में हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार मानवेंद्र सिंह की तरफ से गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया गया था। पकडे़ गए बदमाशों के पास से 20 हजार नकद, चार मोबाइल, फर्जी वोटर आईडी व पैन कार्ड, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।
पुलिस टीम में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अखिलेश चंद्र पांडेय, स्वाट टीम प्रभारी अंजनी कुमार पांडेय, तालकटोरा थाना के अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद, उपनिरीक्षक भरत यादव, साइबर सेल का आरक्षी अखिलेश कुमार सिंह, क्राइम ब्रांच का आरक्षी सूरज, देवेंद्र, सरताज, गोमतीनगर थाना के आरक्षी घनश्याम व अमित और एएसपी उत्तरी के सर्विलांस सेल में तैनात आरक्षी गोविंद शामिल थे। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
तालकटोरा थाना के अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद ने बताया कि ठगों के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की। जिन प्रदेशों और स्थानों पर जिस वक्त मोबाइल नंबर की लोकेशन मिली थी, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई गई।
सैय्यद मोबीन अहमद ने बिहार के मुजफ्फरपुर में जिस अमरेश सरन के एचडीएफसी बैंक खाते में रुपया ट्रांसफर किया था, उसके बारे में जानकारी जुटाई गई। बैंक से खाताधारक का फोटो हासिल करने के साथ ही वहां के अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ की गई। करीब एक सप्ताह की इस मशक्कत के बाद पुलिस को शातिरों का सुराग और उनके फोटो मिल सके।
जयपुर में भी दर्ज हैं शातिरों के खिलाफ केस
अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद ने बताया कि शातिरों के खिलाफ जयपुर में विशेष अपराध एवं साइबर पुलिस थाना में भी धोखाधड़ी और षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज है। वहां भी उन्होंने अधिकारी बनकर ठगी की कोशिश की थी।