ग्राम घैला तहसील लखनऊ के क्षेत्रीय लेखपाल ने 3 जनवरी 2020 को रिपोर्ट दी कि राजस्व अभिलेख में गाटा संख्या-245 रास्ता, गाटा संख्या-247 व गाटा संख्या-249 नाली के रूप में दर्ज है। अजमत अली ने इन पर कब्जा कर ग्राम सभा को क्षति पहुंचाई है। इस रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार (न्यायिक) सदर लखनऊ में ग्राम सभा बनाम अजमत अली वाद दर्ज किया गया।
29 फरवरी को तहसीलदार ने माना कि अजमत अली ने इन गाटों को कैरियर डेंटल मेडिकल कॉलेज की बाउंड्री में मिलाकर अवैध कब्जा किया है। साथ ही अजमत को बेदखल करते हुए 3.30 लाख रुपये और एक हजार रुपये निष्पादन शुल्क जमा करने का आदेश दिया। अजमत ने इस निर्णय के खिलाफ 8 सितंबर को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) लखनऊ के न्यायालय में अपील की।
यहां कोई निर्णय होता इससे पहले ही उनसे राजस्व परिषद में स्थानांतरण वाद दायर कर मामला अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सीतापुर के न्यायालय में ट्रांसफर करवा दिया। जहां 5 अक्तूबर को अजमत की अपील निरस्त हो गई। इस पर अजमत ने तहसीलदार (न्यायिक) सदर लखनऊ और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सीतापुर के आदेश के खिलाफ राजस्व परिषद के समक्ष निगरानी याचिका दायर की थी।
राजस्व संहिता-2006 के वर्ष 2015 में लागू होने के बावजूद तहसीलदार पहले की तरह ग्राम समाज की संपत्ति पर कब्जे से जुड़े वाद की सुनवाई करते आ रहे हैं। नतीजतन पिछले पांच साल में तहसीलदार न्यायालयों के निर्णयों पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे में तहसीलदारों के निर्णय को मान्य करार देने के लिए सरकार को राजस्व संहिता में संशोधन करना होगा। यानी तहसीलदारों को सहायक कलेक्टर घोषित करना होगा।