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रोज दस करोड़ खर्च कर यूपी में हो रहा उजाला

Sun, 28 Sep 2014 11:25 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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दुर्गापूजा नजदीक आने के साथ ही पावर कॉर्पोरेशन पर सूबे के शहरी क्षेत्रों में शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति का दबाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए दुर्गापूजा तक उद्योगों की कटौती करके शाम के  वक्त शहरी क्षेत्रों को बिजली देने का फैसला किया गया है।
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जिला मुख्यालयों से लेकर महानगरों तक को शाम सात बजे से रात 12 बजे तक बिजली देने के लिए गांवों, तहसीलों और छोटे नगरों के साथ-साथ उद्योगों की भी चार घंटे कटौती की जा रही है।

प्रदेश में बिजली की मांग 13,500 मेगावाट से ऊपर पहुंच जाने से कॉर्पोरेशन के लिए आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखना बेहद मुश्किल हो रहा है। एनर्जी एक्सचेंज से रोजाना 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली खरीदने के बाद भी किल्लत बनी हुई है।
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केंद्रीय सेक्टर से शनिवार को भी कोटे की पूरी बिजली नहीं मिल पाई जबकि पनकी की 110 मेगावाट क्षमता की एक इकाई के बंद होने और अनपरा व हरदुआगंज में उत्पादन में कमी के चलते राज्य का तापीय उत्पादन 2000 मेगावाट के आसपास रह गया है।
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पीक आवर्स में 3000 मेगावाट कम

पीक आवर्स में मांग और उपलब्धता का अंतर 3000 मेगावाट तक पहुंच रहा है जबकि सामान्य अवधि में लगभग 2000 मेगावाट बिजली की कमी है।

लोड प्रबंधन के जरिये कॉर्पोरेशन गांवों को दिन में छह घंटे से ज्यादा बिजली देने की कोशिश कर रहा है जबकि शाम को शहरों में कटौतीमुक्त आपूर्ति की कोशिश की जा रही है।

नियंत्रण कक्ष के इंजीनियरों का दावा है कि शनिवार शाम सात बजे के बाद जिला मुख्यालयों से लेकर महानगरों तक कहीं भी अतिरिक्त कटौती नहीं की गई।

1 अक्तूबर के बाद बंद चल रही केंद्र की कुछ इकाइयों के चलने की संभावना है। इसके बाद स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद है।
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