मौसम के बदले मिजाज से स्वाइन फ्लू वायरस के फैलने का खतरा मंडराने लगा है। तापमान में गिरावट से लोग आसानी से संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। बारिश को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों को दवा देने में लगी है और उनको हर संभव इलाज दिया जा रहा है। स्वाइन फ्लू को लेकर मची अव्यवस्था और दहशत पर सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव से खास बातचीत की गई।
रिपोर्ट आने के 24 घंटे बाद भी मरीजों को दवा नहीं मिलने के सवाल के जवाब में डॉ. एसएनएस यादव ने कहा कि टेमीफ्लू के वितरण के लिए सात टीमों के 21 सदस्य मैदान में है। मरीजों से संपर्क कर दवा दी जा रही है। कुछ मरीजों को दवा मिलने में देरी हो रही है। ऐसी स्थिति में वे अपने जोनल अस्पताल से जांच रिपोर्ट के आधार पर दवा ले सकते हैं।
फोन पर क्यों नहीं मिल रही रिपोर्ट
पीजीआई और केजीएमयू पॉजिटिव जांच रिपोर्ट फोन पर नहीं दे रहे इस सवाल के जवाब में सीएमओ ने जवाब दिया कि पीजीआई और केजीएमयू से जारी की जा रही रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को दवा दी जा रही है। पीजीआई और केजीएमयू मरीजों को जांच रिपोर्ट की जानकारी क्यों नहीं दे रहे हैं।
ये वहां के प्रशासनिक अधिकारी ही बता सकते हैं। केजीएमयू और पीजीआई में रोजाना 150 से अधिक सैंपल की जांच हो रही है। मरीजों को आइसोलेट करने में देरी पर जवाब मिला कि सेना के अस्पताल में दो मरीजों की मौत के बाद वायरस कंट्रोल में था।
एक संस्थान के मरीज में वायरस की पुष्टि हुई और पूरा का पूरा परिवार वायरस की चपेट में आ गया। आइसोलेट करने में देरी हुई। मरीजों ने भी लापरवाही बरती। लखनऊ में देशभर से मरीज आते हैं जिस वजह से वायरस फैलता गया।
अस्पतालों में 2 बजे बाद नहीं ले रहे सैंपल
सीएमओ का कहना है कि सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल को नोडल अस्पताल बनाया गया है जहां सैंपल कलेक्शन की सुविधा है। दोपहर दो बजे के बाद सैंपल कलेक्शन की कोई जरूरत नहीं है। जिन लोगों को जांच करानी होती है वो सुबह ही फ्लू क्लीनिक पहुंच जाते हैं।
वहीं हाईकोर्ट ने तीन लाख दवाएं और मास्क खरीदने की बात पर सीएमओ ने बताया कि हाईकोर्ट से अभी इस आदेश की लिखित कॉपी नहीं मिली है जिसमें ये कहा गया हो कि स्वास्थ्य विभाग को तीन लाख टेमीफ्लू दवा और मास्क खरीदना है। वहां से आदेश की कॉपी मिल जाएगी तो शासन निर्णय लेगा। फिलहाल पर्याप्त मात्रा में दवा है और कोई दिक्कत नहीं है।
सीएमओ कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में जो भी जगह थी वहां पर आइसोलेशन वार्ड बनाया गया। सिविल अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड गलत जगह बना है और उसे वहां से शिफ्ट कराया जाएगा। वार्ड के साथ चेस्ट वार्ड है। इस वजह से संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है।
मौसम बदलने से मरीजों की संख्या बढ़ेगी
डॉ. एसएनएस यादव कहते हैं कि बिल्कुल, मौसम साथ नहीं दे रहा है। बारिश के साथ ठंडा हुआ मौसम खतरनाक है। ऐसे में वायरस तेजी से फैल सकता है। होली तक खतरा बना हुआ है। हालांकि वायरस की पॉवर कमजोर हो गई है।
लोग थोड़ी सतर्क रहें तो वायरस को हावी होने से रोका जा सकता है।स्वाइन फ्लू से पीड़ित ज्यादा से ज्यादा रेस्ट करें। साफ-सफाई का ध्यान रखें। वायरस का म्यूटेशन हो गया है। बचाव के लिए इम्यूनिटी लेवल मेंटेन करना जरूरी है। साथ ही सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोग बस, ट्रेन, प्लेन की यात्रा करने से बचें। पब्लिक प्लेस पर जाने से परहेज करें।