स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद पीड़ित और परिवारीजनों को दवा देने में लापरवाही और लेटलतीफी लगातार जारी है।
स्वाइन फ्लू के एक मरीज ने अमर उजाला को बताया कि गोमतीनगर का कारपोरेट अस्पताल हो या एसजीपीजीआई या फिर डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय, हर जगह अछूतों जैसा व्यवहार झेलना पड़ा।
नर्स और अन्य स्टाफ सेवा में जुटा था लेकिन डॉक्टर कमरे में आने को तैयार नहीं थे।
बुधवार को लोहिया अस्पताल से सुबह डॉक्टर ने एक मरीज को सिर्फ इसलिए डिस्चार्ज कर दिया कि मरीज के परिवार की एक महिला ने उससे ये कह दिया कि तुम्हारे माता-पिता होते तो क्या ऐसे इलाज करते।