चिनहट में बेखौफ भूमाफिया ने बुधवार भरी दोपहरी नायब तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो के सामने महंत स्वामी दिनेशानंद सरस्वती (40) की गोलियां मारकर हत्या कर दी। वह करीब दो साल से इलाके में नाला व ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे का विरोध कर रहे थे।
महंत की शिकायत पर दोपहर एक बजे राजस्व अधिकारी उन्हें लेकर सतरिख रोड पर नाले की जमीन की पैमाइश करने पहुंचे थे कि तभी आरोपी सुशील यादव, उसके भाई राकेश व अन्य लोगों ने उनकी एसयूवी रोककर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
महंत की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक घायल हो गया। वारदात के बाद हमलावर बाइक से भाग निकले। हालांकि, तीन घंटे बाद सरायशेख निवासी सुशील यादव और सरायशेख गांव के प्रधान दिलीप विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि महंत मूलरूप से सुल्तानपुर के कूड़ेभार स्थित ऊंचगांव अलीगंज के थे और लगभग दो साल से यहां चिनहट के सतरिख रोड पर संत पल्टूदास आश्रम कुटी में रह रहे थे। उनके परिवार में पत्नी खुशबू, बेटा कुशल, बेटी सौम्य और सानिध्य हैं।
पुलिस के मुताबिक, दबंग कोटेदार सुशील यादव इलाके में ग्राम समाज और नाले की जमीन पर कब्जा करता है। हाल ही में उसने सरायशेख व टेराखास गांव के बीच नाले के किनारे अवैध निर्माण कराया था। महंत ने उसकी शिकायत की, जिस पर डीएम ने पैमाइश के आदेश दिए थे।
इस पर बुधवार दोपहर करीब 12 बजे नायब तहसीलदार शशि त्रिपाठी, लेखपाल हरिशचंद्र और कानूनगो रामशंकर समेत स्थानीय पुलिस व राजस्व विभाग के कर्मचारी उनके घर पहुंचे और जमीन की पैमाइश की बात कहते हुए साथ ले गए।
महंत दिनेशानंद अपनी एसयूवी से चालक नंदगांव निवासी राम सुमिरन यादव के साथ नाले की विवादित जमीन पर पहुंचे। वहां सुशील यादव, राकेश यादव, ग्राम प्रधान दिलीप विश्वकर्मा और पवन पहले से थे। महंत की एसयूवी देखते ही सबने उसे घेरकर रोक लिया और गाली-गलौज करने लगे।
विरोध पर राजस्व विभाग की टीम के सामने ही असलहे निकालकर महंत को ताबड़तोड़ गोलियां मारीं। सीने और पेट में कई गोलियां लगने से महंत ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। चालक की कमर के नीचे एक गोली लगी है। इसके बाद चारों हमलावर बुलेट और बाइक से भाग निकले।
उधर, दोनों को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने महंत को मृत घोषित कर दिया। राम सुमिरन की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वारदात के तीन घंटे बाद सुशील और दिलीप को गिरफ्तार कर लिया गया। शेष आरोपियों को दबोचने के लिए पुलिस की पांच टीमें बनाई गई हैं।