फिलहाल स्वतंत्र देव के मामले में चुनाव की संभावना नहीं है, लेकिन प्रांतीय परिषद के सदस्यों को बुलाया जरूर जाएगा। कारण, चुनाव न होने पर भी उनकी तरफ से चुनाव प्रक्रिया की औपचारिकता पूरी करानी होगी।
दरअसल, पार्टी संविधान में राज्य की विधानसभाओं की सदस्य संख्या के अनुसार प्रांतीय परिषद के सदस्य निर्वाचित किए जाते हैं। इसी तरह लोकसभा सीटों की संख्या के अनुसार राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित होते हैं।
प्रदेश में प्रांतीय परिषद के 403 और राष्ट्रीय परिषद के 80 सदस्य हैं। इस महीने निर्वाचित होने पर स्वतंत्र देव का अध्यक्ष का कार्यकाल जनवरी 2023 तक का होगा। बशर्ते बीच में कोई और जिम्मेदारी न मिल गई।