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लखनऊ के बच्चों पर सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 30 Jan 2017 05:46 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : demo pic
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 भले ही सूबे में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ढेरों योजनाओं के क्रियान्वयन के दावे होते हैं, लेकिन हकीकत इससे काफी जुदा है। हालत इस कदर खराब है कि सूबे की राजधानी तक पढ़ाई के मामले में बेहद पिछड़ा हुआ है।
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बात स्कूल में नामांकन की हो या फिर गुणवत्ता की, हर मामले में लखनऊ का नाम नीचे से तीसरी पायदान पर आता है। इतना ही नहीं राजधानी में सरकारी स्कूल के आठवीं के 78.1 फीसदी बच्चे साधारण भाग के सवाल नहीं लगा पाते हैं।

सरकारी तंत्र आंकड़ों की बाजीगरी में यह तथ्य भले ही छिपा ले, लेकिन सरकारी प्राथमिक स्कूलों की गुणवत्ता पर सर्वे करने वाली संस्था एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) में इसका खुलासा हुआ है।
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रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में अभी भी 8.2 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। नामांकन के मामले में इससे खराब स्थिति केवल बरेली और मुरादाबाद की ही है। बरेली में 12.2 फीसदी और मुरादाबाद में 8.8 फीसदी बच्चे आज भी स्कूल का मुंह नहीं देख पाते हैं।

पढ़ाई की गुणवत्ता के मामले भी लखनऊ का नंबर सबसे खराब रिपोर्ट कार्ड वाले जनपदों की सूची में तीसरे नंबर पर ही आता है। असर की वर्ष 2016 रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के नामांकन में सुधार हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश की स्थिति पहले से खराब हुई है। प्रदेश में अभी भी 5.3 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं।
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दो साल के अंतराल पर जारी की रिपोर्ट

डेमो
वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 4.9 फीसदी था। यह स्थिति तब है जबकि देश भर के स्कूलों में नामांकन में बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, जिन बच्चों का स्कूल में नामांकन भी है उनमें से भी गैरहाजिर रहने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की उपस्थिति का प्रतिशत केवल 50 से 60 फीसदी ही है, जबकि उपस्थिति का राष्ट्रीय प्रतिशत 80 है। संस्था ने इस साल अपनी रिपोर्ट दो साल के अंतराल पर जारी की है। 

गणित में राजधानी के बच्चों की हालत बहुत खराब है। कक्षा तीन से पांच तक के 75.8 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो साधारण घटाने के सवाल नहीं लगा सकते। इस मामले इससे खराब हालत केवल देवीपाटन और बरेली की ही है। देवीपाटन में 81.4 फीसदी और बरेली में 79.4 फीसदी कक्षा तीन से पांच तक के बच्चे ऐसे हैं जो साधारण घटाने के सवाल नहीं लगा सकते हैं।
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