यूपी के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना।
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विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग का आरक्षण समाप्त करने की साजिश का आरोप लगाते हुए सपा व बसपा के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को विधानसभा से बहिर्गमन किया। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यदि आरक्षण के शासनादेश का कहीं उल्लंघन हुआ है तो जांच कराई जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये विश्वविद्यालयों में भर्ती का रोस्टर बदलकर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के आरक्षण पाने के संवैधानिक अधिकार पर कुठाराघात का आरोप लगाया। कहा कि शिक्षक भर्ती में विवि के बजाय विभागवार रोस्टर बनाए जाने के बाद कई विवि में भर्तियां हुई हैं।
इनमें एससी-एसटी व ओबीसी का आरक्षण कोटा 50 फीसदी से घटकर 5 फीसदी तक रह गया। भाजपा आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने भर्तियां निरस्त करने और इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। बसपा के लालजी वर्मा ने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है, आरक्षण को रद्दी की टोकरी में डालने का प्रयास कर रही है।
सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद आरक्षण का शासनादेश 19 फरवरी 2016 को जारी किया गया था। उस समय सपा की सरकार थी। हम आरक्षण को न कम करने जा रहे हैं और न ही खत्म करने जा रहा है। आरक्षण विरोधी बताकर केवल भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाता है। भाजपा आरक्षण की पक्षधर है। सरकार से जवाब से असंतुष्ट होकर सपा, बसपा के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।