केंद्र में मोदी और शाह की ताजपोशी के बाद यूपी में भाजपा की रणनीति भी अब बदली-बदली सी नजर आ रही है। नेताओं के खास लोगों को गद्दी देने की जगह अब सियासत के दिग्गज और जमीनी मोहरों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है।
यूपी में भाजपा को 73 सीटें जिताने वाले और संघ के पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता सुनील बंसल को बीते दिनों महामंत्री संगठन के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी।
अब यूपी के शाहजहांपुर से करीब सात बार से विधायक रह रहे सुरेश खन्ना को विधान मंडल में दल का नेता चुना गया है।
जुझारू और जमीनी माने जाते हैं खन्ना
सुरेश खन्ना की पहचान पार्टी के कुछ ऐसे नेताओं में होती है, जिनका हार से सामना नहीं होता। ये खन्ना की जमीनी और जुझारू कार्यशैली ही है कि वे लगातार 30 साल से भी ज्यादा वक्त से मुस्लिम बहुल सीट पर कब्जा जमाए हुए हैं।
शायद यही खूबी ही है, जिसकी वजह से पूर्व सदन में दल के नेता हुकुम सिंह के सांसद बनने के बाद खन्ना का चुनाव किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को भाजपा विधानमंडल दल की एक बैठक में खन्ना का निर्विरोध चुनाव किया गया। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, महामंत्री संगठन सुनील बंसल के साथ अन्य नेता भी मौजूद रहे। सदन में दल के नेता के रूप में खन्ना के नाम का ऐलान वरिष्ठ भाजपा नेता हृदय नारायण दीक्षित ने किया।
सतीश महाना के पास था दायित्व
सुरेश खन्ना से पहले हुकुम सिंह की जगह कानपुर से भाजपा नेता सतीश महाना कार्यवाहक नेता सदन के तौर पर काम देख रहे थे।
दिलचस्प बात यह भी है कि सुरेश खन्ना भी प्रदेश अध्यक्ष की गुड बुक में गिने जाते हैं और प्रदेश अध्यक्ष के इलाके के करीब से ही आते हैं।