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अपनी ही रची साजिश में फंसा 50,000 रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर, यूं खुली पोल

Thu, 24 Sep 2020 01:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो विवेक त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
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सुरेंद्र कालिया - फोटो : amar ujala
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लखनऊ पुलिस के शिकंजे से बचने के चक्कर में 50,000 रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर व पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र कालिया खुद की रची साजिश में बुरी तरह से फंस गया है। उसने कोलकाता में अवैध असलहे समेत खुद को गिरफ्तार कराने का तानाबाना बुना लेकिन इस खेल में एक चूक ने उस पर कानून का घेरा कस दिया।

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दरअसल, कालिया ने कोलकाता में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को जो स्थानीय पता बताया था, वह फर्जी था। यह पोल तब खुली जब लखनऊ पुलिस कालिया को बी-वारंट पर लेने कोलकाता गई। पुलिस ने कोर्ट में कालिया का असली पता दाखिल किया तो मामला खुल गया।

अब कोलकाता पुलिस कालिया के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराएं बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उधर, कालिया के इस फर्जीवाड़े से उसे बी-वारंट पर लखनऊ लाने के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कालिया ने कोलकाता पुलिस को बताया था कि यहां वह किराये के मकान में रहता है। पुलिस ने पते की छानबीन किए बगैर उसे जेल भेज दिया। इसी दौरान आलमबाग में दर्ज मुकदमे के सिलसिले में कालिया का बी-वारंट बनाकर पुलिस उसे लेने कोलकाता पहुंच गई

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कालिया के बताए पते पर पहुंची पुलिस

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
वहां पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कालिया लखनऊ के आलमबाग का निवासी है। पुलिस ने उसके प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए तो कालिया की झूठी कहानी खुल गई। इस खुलासे से कोलकाता पुलिस में हड़कंप मच गया। आनन-फानन पुलिस की एक टीम कालिया के बताए गए पते पर पहुंची और वहां छानबीन शुरू की।

कालिया से जिस मकान का पता बताया था, वहां के मकान मालिक ने उसकी फोटो को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मकान मालिक का कहना था कि उक्त नाम और शक्ल वाला कोई भी व्यक्ति कभी उनके मकान में किराये पर नहीं रहा। कालिया के झूठ और फर्जीवाड़े से खफा कोलकाता पुलिस अब उसके खिलाफ धोखाधड़ी की धाराएं बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी कालिया के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज है। इस केस में अब धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराएं जोड़ दी जाएंगी जिससे उसे जमानत मिलना मुश्किल हो जाएगा। यही नहीं, कोलकाता से उसे बी-वारंट पर लखनऊ लाना भी आसान नहीं होगा। लखनऊ पुलिस को इसके लिए फिर से प्रयास करने होंगे।
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