सूरजकुंड मेला के लिए भले ही हरियाणा को पहचान मिली हो लेकिन लखनऊ भी कभी ‘सूरजकुंड मेला’ के लिए मशहूर था।
इस खास पहचान को सामने लाने के लिए एमिटी यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटास) संस्था ने सूरजकुंड से हेरिटेज वॉक का आयोजन किया।
वॉक रविवार सुबह 10:30 बजे से शुरू हुआ। इसके साथ सूरजकुंड की महत्ता पर टॉक भी होगी। इसमें एमिटी यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्ट विभाग के छात्र सूरजकुंड पर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इंटास की पदाधिकारी विपुल वार्ष्णेय ने बताया कि गोमती नदी के किनारे पर सूरजकुंड कभी पवित्र स्थान हुआ करता था।
आईने-ए-अकबरी में लिखा गया है कि सूरजकुंड में लोग दूरदराज से पूजा करने और नहाने आते थे।
अबू फजल ने लिखा है कि यह बामुश्किल गोमती से 500 मीटर दूर था। श्रद्धालुओं के लिए हर साल एक मेला का आयोजन भी यहां होता था। इसे सूरजकुंड मेला के नाम से ख्याति मिली।