स्वच्छता सर्वेक्षण समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं में पिछड़ने के बाद अब शहरी बेघरों के लिए आश्रय गृहों (शेल्टर होम) के निर्माण में भी यूपी का परफॉर्मेंस बेहद खराब पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक लाभार्थियों के मद्देनजर प्रदेश में जितने शेल्टर होम बनाए जाने थे, उतने नहीं बनाए गए।
इस पर रिपोर्ट में यूपी को ‘पुअर परफॉर्मर स्टेट’ करार दिया गया है। वहीं, कानपुर को ‘एक्सट्रिमली पुअर सिटी’ बताया गया है। इस स्थिति से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को शेल्टर होम निर्माण के लिए रोडमैप पेश करने का आदेश दिया है।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों के लिए वर्ष 2015 में शेल्टर होम के निर्माण की योजना शुरू की गई थी। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और सूडा के अधीन काम करने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को सौंपी गई थी। मानक के मुताबिक एक लाख की आबादी पर कम से कम एक शेल्टर होम बनाने थे।
वहीं, शहरी बेघर गरीबों को चिह्नित करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सर्वे कराया गया था। इसमें यूपी में 1,54,101 लाभार्थी मिले थे। सर्वे रिपोर्ट में अकेले कानपुर में ही 80 हजार लाभार्थी होने की बात कही गई थी।