वित्तीय वर्ष 2013-14 का दूसरा अनुपूरक बजट सोमवार को विधानमंडल में पेश किया जाएगा।
इसमें प्रदेश सरकार के एजेंडे में सर्वोच्च प्राथमिकता में शुमार लखनऊ मेट्रो व लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे को आगे बढ़ाने, गन्ना समितियों के कमीशन भुगतान, चक गंजरिया को स्थानांतरित कर विकसित करने के लिए बजट प्रावधान किए जाने की संभावना है।
अनुपूरक बजट के जरिये सिंचाई व पीडब्ल्यूडी के कई प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है।
निश्चित समय पर लोकसभा चुनाव के लिए अब छह महीने से भी कम समय बचे हैं।
ऐसे में प्रदेश सरकार किसी उधेड़बुन में उलझने की जगह आने वाले दिनों में विकास के तौर पर पेश की जाने वाली अपनी अहम योजनाओं को रफ्तार देने के लिए जरूरी रकम का इंतजाम कर लेना चाहती है।
बसपा सरकार के यमुना एक्सप्रेस की जवाबी परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए मौजूदा सरकार को कोई निवेशक नहीं मिला।
अब सरकार ने इस परियोजना को अपने दम पर आगे बढ़ाने के लिए मन बना लिया है। संकेत है एक्सप्रेस-वे के लिए करीब 500 करोड़ के बजट का इंतजाम किया जा सकता है।
इसी तरह लखनऊ मेट्रो को रफ्तार देने के लिए सरकार अनुपूरक बजट में जरूरी खर्च का बंदोबस्त कर सकती है।
आईटी सिटी सहित अन्य तमाम परियोजनाओं को विकसित करने के लिए चक गंजरिया फार्म को बाराबंकी के नेबलेट फार्म में स्थानांतरित कर विकसित करने का फैसला हो चुका है।
बताया जा रहा है कि सरकार इसके लिए भी पैसे का प्रावधान कर सकती है। प्रदेश सरकार ने शुगर मिल मालिकों के दबाव में गन्ना समितियों का कमीशन उनसे न लेने और खुद कमीशन का भुगतान करने का फैसला किया है।
समझा जाता है कि करीब 500 करोड़ के कमीशन का बंदोबस्त कर सरकार किसानों व समितियों का आक्रोश थामने का प्रयास करेगी। गन्ना समितियों के अध्यक्षों ने इस फैसले के खिलाफ ताल ठोक रखी है।
इसके अलावा सरकार ने आकस्मिकता निधि से मुजफ्फरनगर केदंगा पीड़ितों को 90 करोड़ रुपये मुआवजे में दिया था। समझा जाता है कि सरकार अनुपूरक बजट में इस पैसे की प्रतिपूर्ति का प्रावधान करेगी।
इसके अलावा सड़कों के सुधार व सिंचाई परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता पर अनुपूरक प्रस्तावों में प्रावधान हो सकता है। अनुपूरक प्रस्ताव चार हजार करोड़ से अधिक का होने का अनुमान है।