सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने अवैध टावर संख्या टी-16 तथा टी-17 को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। सीएम योगी के निर्देश पर आईआईडीसी संजीव मित्तल की अध्यक्षता में उत्तरदायित्व तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था, जिसने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
नोएडा के हाई प्रोफाइल सुपरटेक-एमरॉल्ड कोर्ट घपले की आंच फायर ब्रिगेड तक पहुंच गई है। सुपरटेक लिमिटेड को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने अवैध टॉवरों को एनओसी देने को भी गंभीरता से लिया गया है। मित्तल समिति की रिपोर्ट के आधार पर इसके लिए दोषी पांच अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ जल्द कड़ी कार्रवाई की तैयारी।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने अवैध टावर संख्या टी-16 तथा टी-17 को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। पूरे प्रकरण में सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईआईडीसी संजीव मित्तल की अध्यक्षता में उत्तरदायित्व तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था, जिसने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसके आधार पर अभी तक चार अधिकारी सस्पेंड हो चुके हैं। जबकि उस समय नोएडा में अलग-अलग पदों पर तैनात रहे 4 आईएएस समेत कुल 26 अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
वहीं, जांच में सामने आया है कि ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या-जीएच-4, सेक्टर-93 ए, नोएडा का आवंटन और मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2004 से 2012 के मध्य की है। इस पर मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2005, 2006, 2009 और 2012 में दी गई। अवैध रूप से स्वीकृत मानचित्रों के आधार पर हुए निर्माण को अग्निशमन विभाग ने भी अपना अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया। इसके जिम्मेदार कर्मियों को चिह्नित कर लिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विजिलेंस की एफआईआर में भी इनका नाम शामिल होगा। इतना ही नहीं सुपरटेक लिमिटेड ने 7 हजार वर्ग मीटर की आरक्षित ग्रीन बेल्ट तक को भूखंड में शामिल कर उस पर अतिक्रमण कर लिया।