यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'जहां पड़े पांव, वहीं बंटाधार' की कहानी। इसके अलावा 'समानांतर व्यवस्था वाला लेटर बम' और 'मदद का भाव या पद की चाहत' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
जहां पड़े पांव, वहीं बंटाधार
पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड और सियासत में उलटफेर की जुगत में लगे माफिया टर्न पॉलिटिशियन के सितारे आजकल इतने खराब हैं कि जहां उनके पांव पड़ते हैं, वहीं बंटाधार हो जाता है। जहां जाते हैं, कोडीन का साया चिपका रहता है। प्रवचन सुनने गए लेकिन आचरण नहीं बदला। अब राजनीतिक जीवन में सवालों का जवाब धक्कामुक्की से देने पर नए सवाल भी उठेंगे। सोशल मीडिया सबके चेहरे और हाव-भाव भांप लेता है। चोरी और सीनाजोरी भी कहां छिप पाती है।
समानांतर व्यवस्था वाला लेटर बम
इन दिनों नौकरशाही में आयोग के सर्वेसर्वा की एक चिट्ठी खूब चर्चा में है। कहा जा रहा है कि ऐसी चिट्ठी जारी करने का अधिकार सिर्फ दो ही अफसरों को है। सर्वेसर्वा के लेटर के अंत में दो ऐसे शब्द लिखे हैं जिनकी चर्चा सभी कर रहे हैं लेकिन बोल कोई भी कुछ नहीं रहा है। उनका कहना है कि अगर इस पर अमल हुआ तो पूरी की पूरी समानांतर व्यवस्था खड़ी हो जाएगी।
मदद का भाव या पद की चाहत
सूबे की राजधानी में इन दिनों एक महिला डॉक्टर के धर्मांतरण का मामला गरम है। इस मामले को लेकर तमाम दल अपने-अपने तरीके से राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। इसी बीच सांविधानिक संस्था की पदाधिकारी मैडम ने भी आपदा में अवसर तलाश लिया।
चर्चा है कि पीड़िता की मदद का भाव लेकर मैडम भारी भीड़ लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं तो समर्थकों ने भी उत्साह दिखाया और जमकर नारेबाजी, हंगामा, बवाल काटा। लिहाजा अब लोग मैडम के मदद के भाव को सियासी हथकंडा नाम दे रहे हैं। दरअसल मैडम के काफी दिनों से बड़े पद को लेकर लामबंदी करने की चर्चा है। चर्चा है कि इस मदद के पीछे कहीं पद की चाहत तो नहीं।