इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने नगर पालिका परिषद, सुल्तानपुर की चेयरमैन बबिता जायसवाल के वित्तीय अधिकार सीज की जाने के शासन के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया चेयरमैन को पद से हटाने की कोई कार्यवाही बगैर वित्तीय अधिकार सीज करने का आदेश जारी किया गया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय व न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने चेयरमैन बबिता जायसवाल की याचिका पर पारित किया। याची की ओर से शासन द्वारा 3 अगस्त को जारी वित्तीय अधिकार सीज करने सम्बंधी आदेश को चुनौती देते हुए, दलील दी गई थी कि 2 मई 2022 को उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस में उन पर सिर्फ एक आरोप लगाते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब किया गया था। इसके पूर्व 2 मई 2019 को भी एक कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए, उनसे पूछा गया था कि उन्हें उनके पद से क्यों न हटा दिया जाए, साथ ही यह भी पूछा गया था कि क्यों न उन्हें प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों से वंचित कर दिया जाए।
यह भी दलील दी गई कि 2 मई 2019 को भेजी गई नोटिस में ऐसे कोई भी आरोप नहीं लगाए गए थे जो इस बार 2 मई 2022 को भेजी गई नोटिस में लगाए गए। न्यायालय ने पाया कि 2 मई 2022 की नोटिस में सिर्फ यह स्पष्टीकरण नहीं तलब किया गया कि याची को क्यों न उसके पद से हटा दिया जाए, बल्कि सिर्फ यह पूछा गया कि क्यों न उसे प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों से वंचित कर दिया जाए। न्यायालय ने कहा कि बिना किसी प्रक्त्रिस्या के म्युनिसिपल एक्ट की धारा 48 के परंतुक के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।