अपहरण के बाद धारदार हथियार से मारकर घायल किए गए दिव्यांश ने मौत को मात देकर जिंदगी की जंग जीत ली है। आठ दिन बाद ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में दिव्यांश ने शुक्रवार की शाम आंख खोली। बेटे ने पिता को पहचाना तो घर वालों के खुशी की ठिकाना नहीं रहा। जो भी अस्पताल में मौजूद था, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
गोसाईगंज थाना क्षेत्र के कटका खानपुर निवासी फ्लॉवर डेकोरेटर व्यवसायी राकेश अग्रहरि के बेटे दिव्यांश (8) और श्रेयांश (6) का 20 दिसंबर को स्कूल के बाहर से अपहरण कर लिया गया था।
अपहरणकर्ताओं ने पिता को फोन करके 50 लाख रुपये फिरौती मांगी थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर केस दर्ज कर मामले की तफ्तीश में जुटी थी। एसपी अनुराग वत्स के निर्देश में गठित टीम ने दिव्यांश को 12 घंटे के अंदर ही कोतवाली नगर क्षेत्र के करौंदिया मोहल्ले में चांदबीवी के मकान से बरामद किया था जबकि श्रेयांश की मौत हो चुकी थी।
गंभीर रूप से घायल दिव्यांश को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में भर्ती कराया गया था, जहां उसे देखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे थे। शुक्रवार की शाम पांच बजे दिव्यांश ने जब आंख खोली तो घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
दिव्यांश ने सबसे पहले अपने पिता राकेश अग्रहरि को देखा। दिव्यांश को कुशल देखकर परिवारीजनों के आंखों से आंसू छलक पड़े। घर वालों ने दिव्यांश की देखरेख कर रहे चिकित्सकों का आभार जताया। थानाध्यक्ष गोसाईगंज केबी सिंह ने बताया कि दिव्यांश सकुशल है। दिव्यांश की चिकित्सा और देखरेख करने वाले चिकित्सक उसे दवा दे रहे हैं। उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।