मृतक डॉ. घनश्याम तिवारी।
- फोटो : amar ujala
चिकित्सक घनश्याम तिवारी की पत्नी ने सरकारी मदद को ठुकरा दिया है। उन्होंने दस लाख रुपये का चेक लेकर पहुंचे तहसीलदार को वापस कर दिया। कहा कि वे अब तक हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। अब तक जो कार्रवाई हुई है, वह महज दिखावे की है। इसलिए वे चाहती हैं कि इस मामले की सीबीआई जांच हो।
संविदा चिकित्सक घनश्याम तिवारी की 10 अक्टूबर को कोतवाली नगर के नारायनपुर गांव में सरेआम हत्या कर दी गई थी। पोस्टमॉर्टम के बाद जब शव परिजनों को मिला तो परिजनों ने दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद प्रशासन और भाजपा के नेताओं ने उन्हें किसी तरह मनाया था।
साथ ही चिकित्सक की पत्नी को नौकरी देने, एक करोड़ रुपये की मदद, सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की शर्तें भी मानीं थीं। इस समझौते पत्र पर तत्कालीन जिलाधिकारी जसजीत कौर के साथ ही भाजपा विधायक सीताराम वर्मा, पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी और भाजपा जिलाध्यक्ष आरए वर्मा ने भी हस्ताक्षर किए थे।
इन मांगों में अभी तक एक भी मांग पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में बृहस्पतिवार को दस लाख रुपये का चेक लेकर पहुंचे तहसीलदार को चिकित्सक की पत्नी निशा तिवारी ने उल्टे पांव लौटा दिया। कहा कि वे इस धनराशि और अब तक हुई कार्रवाई से असंतुष्ट हैं।
कहा कि जिस समय मेरे पति का शव रखा हुआ था, तब सारी मांगों को माना गया था। जो मेरी मांगें थीं उनमें से एक भी पूरी नहीं की गई है। उन्होंने मीडिया के सामने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे उनके साथ निष्पक्ष बरताव करें और निष्पक्ष कार्रवाई हो। उनकी सुरक्षा और अब तक आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर चिंता जताई।