अभियान से संबंधित जिलों में सबसे पहले विभिन्न वाटरशेड ढांचों जैसे डैम, तालाब, एमआई टैंक तथा फार्म पांड को चिन्हित किया जाता है। उसके बाद प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति दी जाती है। मशीनों से बांधों, तालाब और झीलों की खुदाई व सफाई कर मिट्टी निकाली जाती है। मशीनें कंपनियों के सीआरएस फंड से उपलब्ध होती हैं। मशीनों के लिए आवश्यक डीजल प्रशासन उपलब्ध कराता है।
खुदाई से निकलने वाली उपजाऊ मिट्टी को कृषक अपने खर्चे से खेतों में पहुंचा देते हैं। इस प्रकार जन सहयोग, जिला प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों, कॉरपोरेट सेक्टर, विभिन्न दलों की सहभागिता से यह अभियान चलता है। महोबा और हमीरपुर में प्रयोग सफल होने के बाद पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में इसे लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चन्द्र पांडेय, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण आयुक्त दीपक सिंघल, नीति आयोग के अन्य अधिकारी एवं भारतीय जैन संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे।