कुछ हफ्ते पहले एक युवा महिला डॉक्टर ने आत्महत्या करने से पहले सुसाइड नोट में इसका कारण खुद को किसी लायक न मानना बताया।
एक सीए स्टूडेंट ने परीक्षा के बाद खुद को कमरे में बंद करके इसलिए फांसी लगा ली क्योंकि उसका पेपर अच्छा नहीं हुआ था।
बीफार्मा की स्टूडेंट ने सीनियर स्टूडेंट्स द्वारा तंग किए जाने के बाद कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूद कर खुदकशी कर ली। लखनऊ में हुए ये सभी मामले युवाओं की आत्महत्याओं के हैं।
ये हैं खौफनाक आकड़े
वे युवा जिनसे भविष्य की उम्मीद बंधती है और जिन्हें
उत्कृष्ट नागरिक बनाने के लिए उनके परिवार से लेकर समाज और सरकार तक अपने
सारे संसाधन लगा देते हैं, लेकिन जब यही युवा आत्महत्या जैसा कदम उठाने
लगें तो समझ जाना चाहिए कि व्यवस्था में कहीं न कहीं बहुत बड़ी गड़बड़ी घर
कर गई है।
बीते वर्ष उत्तर प्रदेश में 15 से 44 साल के 3,895 युवाओं ने मौत को गले लगा लिया।
नेशनल
क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से आत्महत्याओं को लेकर जारी
आंकड़ों के अनुसार यह संख्या कुल आत्महत्याओं का 73.68 प्रतिशत है।
इसलिए कर रहे हैं आत्महत्या
देश में ज्यादातर जगहों पर आत्महत्या करने वालों की
संख्या में जहां कमी आई है, वहीं उत्तर प्रदेश में ये मामले काफी तेजी से
बढ़े हैं।
अरुणाचल प्रदेश (76.2 प्रतिशत), बिहार (39.3 प्रतिशत) और नागालैंड (23 प्रतिशत) के बाद यूपी (19.5 प्रतिशत) चौथे नंबर पर है।
इसे
लेकर लखनऊ यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर अर्चना शुक्ला कहती हैं
कि इसकी वजह युवाओं में कॅरिअर और अन्य कारणों से बढ़ रहा दबाव और कुंठा
है।
समाज तेजी से बदल रहा है और हर कोई अपने आप में व्यस्त है। कोई
व्यक्ति अपना काम क्यों नहीं कर पाया, यह जानने के बजाय उसे नकारा बताने की
कोशिश होती है। यहीं से दबाव कुंठा में बदलने लगता है।
आत्महत्या करना लगता है आसान
डॉ. शुक्ला कहती हैं कि समाज का मतलब है कि एक-दूसरे
के सहयोगी बनें, अगर कोई साथी-परिचित समस्या में घिरा हो तो उसे उससे बाहर
निकालने में सहयोग करें, लेकिन दोस्त, शिक्षकों और सहकर्मियों से लेकर
अभिभावक तक युवाओं पर प्रेशर बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
इसका परिणाम
आत्महत्याओं के रूप में देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर मनोचिकित्सक डॉ.
दीपक नंदवंशी कहते हैं आत्महत्याएं दो हालात में हो रही हैं। पहली, भावनाओं
की गहनता और उसके बाद हुई प्रतिक्रिया से।
बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड
में झगड़ा हुआ तो छत से कूद गए, मां-पिता ने कुछ कहा तो फांसी लगा ली। ये
इसी के उदाहरण हैं। दूसरी स्थिति निरंतर अवसाद में रहने से आ रही है। यह
अवसाद किसी ऐसी बात या समस्या से पैदा हो रहा है, जिसका व्यक्ति समाधान
नहीं निकाल पा रहा है।
कई बार वह सोचने को ही तैयार नहीं होता कि
कोई समाधान भी हो सकता है। ऐसे में उसे आत्महत्या करना आसान लगता है। ऐसे
लोगों को समझाना होगा कि समस्याएं जीवन से बढ़कर नहीं हैं।
ऐसे रुक सकती हैं आत्महत्याएं
इस मामले पर मनोचिकित्सक डॉ. दीपक नंदवंशी का कहना है
कि भावनाओं की तीव्रता में हुई आत्महत्याओं को रोकने के लिए जरूरी है कि
व्यक्ति अपनी भावनाएं किसी से शेयर करता रहे। इससे भीतर से शांति आएगी और
आत्महत्या जैसा कदम वह नहीं उठाएगा। वहीं अवसाद में आत्महत्याएं रोकने के
लिए मां-पिता अपने बच्चों को शुरू से मजबूत बनाएं। तार्किक ढंग से चीजों का
विश्लेषण करना सिखाएं।
अवसादग्रस्त साथी की भावनाओं को समझें
वहीं
लखनऊ विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की प्रो. अर्चना शुक्ला का कहना
है कि युवाओं पर पढ़ाई, कॅरिअर, रिलेशनशिप में सफल होने का प्रेशर है।
दूसरी ओर उनकी हालत को कोई नहीं समझ रहा है। समाज में ‘लॉस ऑफ फेथ’ की
स्थिति आए, उसके पहले संभलना होगा। जो साथी अवसाद में या मुश्किल में दिखें
उनसे बात करें, बजाय अपनी बात कहने के उन्हें समझने की कोशिश करें।
हाल-ए-उत्तर प्रदेश
-5,286 लोगों ने सूबे में आत्महत्या की।
-3.9 प्रतिशत है यह देश में हुई कुल 1,34,799 आत्महत्याओं का।
-864 ज्यादा आत्महत्याओं के साथ यूपी में 2012 के मुकाबले 19.5 प्रतिशत मामले बढ़े हैं।
-दुखद यह कि इसी दौरान देश में आत्महत्या के मामलों में 0.6 प्रतिशत कमी आई है।
-कानपुर देश के 88 प्रमुख शहरों में 7वां सर्वाधिक आत्महत्याओं वाला शहर बना।
ये है प्रमुख शहरों की हालत
इलाहाबाद--193.1 प्रतिशत ज्यादा आत्महत्याओं के साथ इलाहाबाद ने चौंकाया है। यहां 2012 में केवल 87 आत्महत्याएं हुई थीं, अगले वर्ष संख्या 255 हो गई।
आगरा--2012 में 31 के मुकाबले 2013 में आत्महत्या के 68 मामले सामने आए। 119.4 प्रतिशत बढ़ोतरी।
कानपुर--यहां प्रदेश की सर्वाधिक आत्महत्याएं हुईं, लेकिन शहर ने पिछली बार के 677 के आंकड़े को 4.3 प्रतिशत कम करने में सफलता पाई।
लखनऊ--8.9 प्रतिशत मामले बढ़े, आंकड़ा 225 से 245 हो गया।
वाराणसी--61 प्रतिशत मामले बढ़े। 75 के मुकाबले 121 आत्महत्याएं हुईं।
शादी टूटी तो कर ली आत्महत्या
आत्महत्या की कई वजहें बेहद विडंबनापूर्ण नजर आईं।
प्रदेश में 57 लोगों ने महज शादी पक्की होने के बाद उसके टूटने पर अपनी
जिंदगी खत्म कर दी। इनमें 38 लड़कियां थीं। वहीं 13 लड़कियों ने दुराचार के
बाद मौत को गले लगाया। अवैध संबंध का शक होने पर 145 लोगों ने आत्महत्या
की, जिनमें 77 पुरुष थे।
वजहें--भारत--यूपी
प्रेम प्रकरण में: 4,495 - 337
अवैध संबंध का शक जताने पर: 1,155 - 145
दुराचार होने पर: 270 - 13
शादी की बात टूटने पर: 1,081 - 57
गरीबी: 1,866 - 37
आर्थिक नुकसान या दिवाला: 2,678 - 29
प्रोफेशन या कॅरिअर में समस्या: 1,311 - 33
बेरोजगारी से तंग आकर: 2,090 - 55
बच्चा न होने पर: 653 - 53
एड्स होने पर: 590 - 66
कैंसर होने पर: 781 - 40
अन्य बीमारियों में: 25,055 - 529
प्रियजन की मौत पर: 996 - 41
दहेज के विवाद पर: 2,267 - 472
ड्रग की लत में: 4,591 - 118
परीक्षा में फेल होने पर: 2,471 - 152
पारिवारिक समस्याएं: 32,325 - 733
बिना विवाह के गर्भवती होने पर: 153 - 25
अज्ञात कारणों से: 20,965 - 1,025
अन्य कारण: 27,890 - 1,273
750 किसानों ने की खुदकुशी
वर्ष 2013 में देश में 11,772 किसानों ने आत्महत्याएं कीं। इनमें से 750 किसान उत्तर प्रदेश से थे। वहीं आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की रही, जिनका खुद का कारोबार था।
पेशा: भारत - यूपी
हाउस वाइफ: 22,742 - 1,170
सर्विस: 16,706 - 748
स्टूडेंट्स: 8,423 - 405
बेरोजगार: 9,768 - 370
खुद का रोजगार: 51,234 - 1,627
रिटायर्ड: 1,117 - 18
अन्य: 24,809 - 948
कम पढ़े-लिखों के मामले ज्यादा
अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोगों का आत्महत्या का आंकड़ा अधिक रहा। तकरीबन 78 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले 10वीं तक या उससे कम पढ़े थे।
स्तर: भारत - यूपी
अनपढ़: 25,004 - 1,130
प्राथमिक: 25,824 - 994
माध्यमिक: 31,774 - 979
दसवीं पास: 27,596 - 1,054
12वीं पास: 13,849 - 739
डिप्लोमा: 1,656 - 77
ग्रेजुएट: 4,380 - 262
पीजी और उससे ऊपर: 716 - 51
फांसी-आत्मदाह से सबसे ज्यादा आत्महत्या
आत्महत्या के लिए प्रदेश में लोगों ने फांसी लगाना और
खुद को जलाने जैसे तरीके अधिक अपनाए। वहीं ट्रेन से कूदकर आत्महत्या के
देश में हुए मामलों में 33 प्रतिशत यूपी से हैं तो खुद को गोली मारने के 35
प्रतिशत मामले भी यहीं से रहे।
तरीके: भारत - यूपी
अधिक शराब पीकर: 1,609 - 196
डूबकर: 7,646 - 311
आत्मदाह: 9,964 - 541
गोली मारकर: 510 - 181
फांसी लगाकर: 53,636 - 1,704
कीटनाशक पीकर: 19,458 - 452
जहर खाकर: 18,167 - 363
नींद की गोलियां खाकर: 526 - 106
चलती ट्रेन या वाहन से कूदकर: 637 - 176
ऊंचाई या इमारत से कूदकर: 1,313 - 64
चलती ट्रेन या वाहन से कटकर: 4,738 - 144
अन्य: 15,389 - 1,048