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किसानों का 7529 करोड़ दबाए बैठी हैं चीनी मिलें

Mon, 23 Jun 2014 08:17 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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किसानों को 30 जून तक भुगतान करने के हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रदेश की चीनी मिलें किसानों का 7,529 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य दबाए बैठी हैं।
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इसके अलावा वर्ष 2012-13 का 44 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भी अभी तक बकाया है। बकाये पर ब्याज अलग से।

हालांकि गन्ना विभाग ने 17 चीनी मिलों के खिलाफ आरसी जारी की है लेकिन उनसे बकाया वसूली को सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

प्रदेश सरकार को गन्ना मूल्य भुगतान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 30 जून तक जवाब देना है। इस केस में अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी।

2012-13 का 44 करोड़ भी बाकी

पिछले दो पेराई सत्र गन्ना किसानों के लिए अच्छे नहीं रहे। कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव में सपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

गन्ना बेल्ट में सपा का सफाया हो गया। चीनी मिलों पर बीते पेराई सत्र के साथ ही वर्ष 2012-13 का 44 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य भी बाकी है।

किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 मई को आदेश दिया था कि गन्ना मूल्य भुगतान कर 30 जून तक जानकारी दी जाए।

यह भी कहा था कि भुगतान न होने की स्थिति में गन्ना आयुक्त को जिम्मेदार माना जाएगा।

गन्ना आयुक्त ने 21 जून को बकाया गन्ना मूल्य की समीक्षा करते हुए चीनी मिलों को भुगतान के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। गन्ना आयुक्त ने 28 जून को फिर बैठक बुलाई है।

नवंबर तक लटकाना चाहते थे बकाया

किसान नेता वीएम सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के डर से प्रदेश सरकार को गन्ना मूल्य भुगतान की याद आई है। 17 मिलों को आरसी जारी करके कार्रवाई की खानापूर्ति की जा रही है।

वह कहते हैं कि शुगर इंडस्ट्री चाहती थीं कि बकाया भुगतान नवंबर तक लटकाया जाए ताकि नए पेराई सत्र के समय किसान दबाव में रहें। उस समय किसान कहें कि पहले मिल चलवा दो भुगतान बाद में दिलवा देना।

शुगर लॉबी की यह मंशा कामयाब नहीं होने दी जाएगी। चीनी मिलों को बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज भी देना होगा। ब्याज से मुक्ति तभी संभव है जब अदालत किसानों की ब्याज माफी का आदेश दे दे।

बजट में 400 करोड़ रुपये मंजूर

प्रदेश सरकार ने सहकारी चीनी मिलों से किसानों को बकाया भुगतान कराने के लिए बजट में 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

प्रदेश के 22 सहकारी चीनी मिलों पर किसानों का 646.30 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।

सहकारी क्षेत्र के स्नेह रोड, नजीबाबाद (बिजनौर) मिल ने अपने संसाधनों के सौ फीसदी गन्ना मूल्य अदा कर दिया है।
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आश्रित बच्चों को जीरो फीस पर मिले दाखिला

राष्ट्रीय लोकदल के नेता डॉ. राजकुमार सांगवान ने गन्ना किसानों के आश्रित छात्र-छात्राओं को जीरो फीस पर निशुल्क प्रवेश देने की मांग की है।

डॉ. सांगवान ने विधानमंडल के सत्र को देखते हुए मुख्यमंत्री और विरोधी दलों के नेताओं को पत्र भेजकर  गन्ना किसानों पर आश्रित छात्र-छात्राओं की मुश्किलों से अवगत कराया है।

उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद गन्ना मूल्य भुगतान न होने से किसानों के बच्चों को स्कूल-कालेजों में दाखिलों से वंचित होना पड़ेगा।
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