सूबे की सरकार चलाने में पंचम तल का खूब नाम आता है, पर गन्ने का अपना पंचम तल भी है।
वहां बैठे अफसर पूरे प्रदेश के गन्ने की पेराई कर कई ब्रांड की चीनी तैयार कराते हैं। गन्ने का एक और केंद्र बापू भवन में है।
गन्ने की राजनीति से जुड़े लोगों में इसे लेकर तमाम चर्चाएं हैं। जितने मुंह, उतनी बातें।
कहा जा रहा है कि बापू भवन में ऐसा कोल्हू चला कि गन्ने का पंचम तल भी पिस गया। इसका जूस बापू भवन में निकला और बगास गन्ना भवन पहुंची। मैली के भी तमाम दावेदार रहे।
बात जितनी घुमावदार लग रही है, उससे भी कहीं ज्यादा है। यूं समझिए कि गन्ने की मिठास बढ़ाने के चक्कर में चीनी मिलों की पसंद-नापसंदी में अफसरशाही भी शामिल हो गई। आखिर में चली ब्ल्यू आई बने अफसर की।
गन्ना और चीनी के स्वाद में दिलचस्पी रखने वाले अब यही सवाल कर रहे हैं कि पटकथा पहले ही लिख ली गई थी तो इतना सस्पेंस क्यों बनाया गया? इससे मुनाफा किसे हुआ और घाटा किसे?