गर्भावस्था में मधुमेह हो तो सावधानी बरतना जरूरी है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत हो सकती है। इसीलिए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों को सलाह दी गई है कि वो प्रत्येक गर्भवती का शुगर टेस्ट जरूर कराएं, जिससे उनमें बीमारी का पता लगाया जा सके।
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग क्वीन मेरी में ये जानकारी डायटीशियन शालिनी ने दी। विश्व मधुमेह दिवस के मौकेपर उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के 24 सप्ताह बाद होने वाली डायबिटीज में प्रसव के बाद महिला फिर से सामान्य हो जाती है।
यदि महिला को पहले से डायबिटीज है तो सावधानी बरतना और डायबिटीज को कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है। अधिक वजन की महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की आशंका अधिक होती है।
डायटीशियन शालिनी ने बताया कि परिवारीजन सोचते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां का भोजन डबल कर दिया जाए। जिससे जच्चा और बच्चा को सही पोषण मिले। जबकि ये गलत है। भोजन में पौष्टिकता की मात्रा बढ़ानी होती है न कि खाद्य पदार्थ की।