लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में मंगलवार को पालि दिवस पर परिचर्चा हुई। संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने कहा, भगवान बुद्ध के विचारों को समझने के लिए पालि त्रिपिटक और पालि साहित्य का अध्ययन जरूरी है। डॉ. धीरेंद्र सिहं ने बताया कि पालि भाषा में वर्णित बौद्ध साहित्य का अध्ययन करके भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सकता है।
डॉ. अवधेश चौबे ने बताया कि पालि साहित्य को संरक्षित करने में श्रीलंका, म्यांमार का अहम योगदान रहा है। बौद्ध शोध संस्थान के सदस्य भिक्षु धम्मानंद ने कहा कि पालि भाषा को रोजगार परक बनाने पर कार्य होना चाहिए।