छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में एक के बाद एक सामने आए घपले से सबक लेते हुए पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के इस्तेमाल का फैसला तो ठीक था, मगर नई व्यवस्था लागू करने में हर स्तर पर भारी चूक हुई।
पारदर्शिता लाने के लिए यह अब तक का सबसे बेहतर सिस्टम है, लेकिन अधिकारी नई तकनीक के हिसाब से खुद को नहीं ढाल पाए और नतीजा करीब 17 लाख छात्रों को भुगतना पड़ा।
शुरू से ही पता था कि पीएफएमएस सॉफ्टवेयर हर बिंदु की जांच बड़ी ही बारीकी से करता है। मसलन, अगर एकाउंट नंबर का पहला डिजिट ‘जीरो’ है और छात्र ने इसे छोड़ दिया तो पीएफएमएस सॉफ्टवेयर उस खाता नंबर को स्वीकार नहीं करेगा।
वहीं, छात्र ने खाता नंबर सही भी लिखा हो, मगर आईएफएस कोड गलत होगा तो पीएफएमएस सॉफ्टवेयर उसे स्वीकार नहीं करेगा।
आवेदन में सही जानकारी भरना छात्र की जिम्मेदारी है, लेकिन संस्थान और फिर जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा इसे जांचने की व्यवस्था इसलिए की गई है कि छात्र के स्तर पर हुई गलती को पकड़ा जा सके।