प्लेसमेंट के अभाव में पीजी डिप्लोमा में दाखिला लेने से बच रहे विद्यार्थी
लखनऊ। राजकीय पॉलीटेक्निक में पीजी डिप्लोमा कोर्सों को लेकर छात्रों का रुझान लगातार घटता जा रहा है। प्रमुख कारणों में प्लेसमेंट की स्पष्ट व्यवस्था न होना और अन्य संस्थानों में बेहतर अवसर होना बताया जा रहा है। इसी वजह से इस वर्ष भी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की तुलना में पीजी डिप्लोमा में दाखिले की संख्या बेहद कम है।
संस्थान के प्रधानाचार्य संदीप कुमार ने बताया कि संस्थान में संचालित 19 पाठ्यक्रमों में कुल 1167 सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से अब तक तीन चरणों की काउंसिलिंग में केवल 743 सीटों पर ही दाखिले हो सके हैं। शेष 424 सीटें अब भी खाली हैं।
उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में सीटें लगभग भर चुकी हैं, जबकि पीजी डिप्लोमा में छात्र रुचि नहीं ले रहे। प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है, और संस्थान को उम्मीद है कि अंतिम चरण तक कुछ और सीटें भर सकती हैं।
छात्र क्यों नहीं दिखा रहे रुचि पॉलीटेक्निक प्रबंधन के अनुसार, पीजी डिप्लोमा में प्लेसमेंट नेटवर्क की कमी सबसे बड़ी बाधा है। वहीं, कई छात्र स्नातकोत्तर के बाद अन्य विश्वविद्यालयों या संस्थानों में नियमित डिग्री पाठ्यक्रमों को तरजीह दे रहे हैं।
संभावनाओं की तलाश बाकी
संस्थान द्वारा भविष्य में पीजी डिप्लोमा को और अधिक व्यावसायिक व रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात भी कही गई है, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल किया जा सके।