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अयोध्या की आवाज, संस्कृत को बचा पाएंगी स्मृति?

Fri, 28 Nov 2014 02:37 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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संस्कृत की वकालत कर रहे लोगों का साथ देने के लिए कुछ नए लड़ाके भी मैदान में उतर आए हैं। अयोध्या के गुरुकुलों में वेदों की पढ़ाई कर रहे नौ से 16 साल के बच्चे स्कूलों में संस्कृत पढ़ाए जाने के पक्ष में हैं।
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इसके पीछे उनका तर्क है कि संस्कृत हर भारतीय की मातृभाषा है। कुछ ऐसे ही भाव लखनऊ और इलाहाबाद के गुरुकुल में पढ़ रहे छात्रों के मन में भी उमड़ रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अयोध्या के कारसेवकपुरम में चलने वाले श्री राम वेद विद्यालय में 12 साल के छात्र अवनीश पांडेय भी खुले दिल से संस्कृत का समर्थन करते हैं।
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उनका कहना है, ‘संस्कृत हमारी मातृभाषा है और हर भारतीय को ये भाषा पढ़नी चाहिए।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी मां भी ये भाषा बोलती हैं तो उनका जवाब था, ‘हमारा देश हमारी मां है और अगर देश की मूल भाषा संस्कृत है तो ये हमारी मातृभाषा है।‘
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...तो अस्तित्व न खोते 3 वेद

श्री राम वेद विद्यालय उज्जैन के महर्षि राष्ट्रीय संदीपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान से संबद्ध है, ये यूनियन एचआरडी मिनिस्ट्री के अंतर्गत आता है। यहां बच्चों को 9 साल की उम्र से ही वेद पढ़ाए जाते हैं।

वेदों की पढ़ाई कर रहे 16 साल के ओमजी तिवारी का कहना है, संस्कृत को बढ़ावा देने से देश की संस्कृति को मजबूती मिलेगी। अगर हमने पहले ही ऐसा कर लिया होता तो सात में से 3 वेद अपना अस्तित्व न खोते।

इलाहाबाद के श्री महंत विचारानंद संस्कृत हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई कर रहे 13 साल के शिवम का मानना है, संस्कृत देव भाषा है। संस्कृत की पढ़ाई से पौराणिक कथाओं में रुचि बढ़ेगी और देश की संस्कृति जीवित रहेगी।
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‘स्मृति ईरानी से मिला, तो करूंगा विनती’

लखनऊ में वेदों की पढ़ाई कर रहे 14 साल के शिव कुमार मिश्र का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी लगता था कि इस भाषा में महारत हासिल करना मुश्किल है।

‘मुझे लगा कि ये तार्किक है और फिर ये आसान हो गया। अगर मैं एचआरडी मिनिस्टर से मिल पाया तो उनसे विनती करूंगा कि इस प्रोजेक्ट को बंद न करें। संस्कृत पढ़कर हम अपने पुराने संदर्भों को अच्छी तरह पढ़ और समझ सकेंगे जिससे देश को आगे ले जाने में मदद मिलेगी।’

लखनऊ के छात्र अविरल तिवारी का कहना है, कम से कम उनमें (स्मृति ईरानी) में इतना साहस है कि वह इस बात पर बहस कर सकें। संस्कृत हमारी संस्कृति और समाज को बचाने में मदद करेगी।
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