‘अबे इतने बड़े बाल क्यों रखे हैं, डॉक्टर बनने आया है या हीरो बनने। बाल छोटे करा ले, तू हां तू ही बे, बहुत अकड़ रहा है, एक मिनट में तेरी अकड़ उतार देंगे। हां एक बात और नाइंटी (किसी सीनियर को देखते ही 90 डिग्री झुककर सलामी देना) मारना सीख ले।
बेटा, अभी तो शुरुआत है, आगे आगे देखता जा। जैसा हम कह रहे हैं वही कर। रोजाना न डॉक्टर आएंगे और न ही गार्ड, सब दिखावे का होता है, हमें भी लगता था कि खूब सुरक्षा में हैं।
सीनियरों ने बहुत सबक सिखाया है। हम नहीं रैगिंग करेंगे तो तू अगले साल कैसे रैगिंग कर पाएगा।’ जी हां आप सही समझे यह रैगिंग का सीन है। पर गौर करने वाली बात यह है कि यह दृश्य कहीं और का नहीं बल्कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कैंपस का है।
भारीभरकम एंटी रैगिंग कमेटी, गार्डों की निगहबानी के बावजूद एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंटों की रैगिंग शुरू हो गई है। इससे फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट सहमे हुए हैं। बीएच पांच हॉस्टल से निकलने के बाद और फिर हॉस्टल के गेट में आने से पहले स्टूडेंटों की सांस अटकी रह रही है। कब कौन सीनियर क्या कह दे।