लखनऊ। डफरिन अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने आए अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया इतनी जटिल और धीमी है कि लोगों को चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है, फिर भी काम आसानी से हो रहा।
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि यहां अभिभावकों के बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं है। बड़ी संख्या में महिलाएं नवजात शिशुओं के साथ अस्पताल परिसर की सड़क या खुले में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने पर मजबूर हैं।
माल स्थित भटूखेरवा बंशीगढ़ी निवासी पुष्पा देवी ने बताया कि उन्होंने नौ सितंबर को अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। डिस्चार्ज के समय जब उन्होंने जन्म प्रमाणपत्र बनाने की गुजारिश की, तो कर्मचारियों ने टीकाकरण के दौरान आने की सलाह दी थी। टीकाकरण के लिए कई बार अस्पताल आने के बावजूद प्रमाणपत्र नहीं बन सका। सोमवार को वह सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचीं, लेकिन दोपहर डेढ़ बजे तक भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पाया। पुष्पा की तरह दर्जनों महिलाएं प्रमाणपत्र के इंतजार में कतार में लगी थीं।
महिलाओं का कहना है कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सिर्फ एक ही काउंटर है, जबकि आवेदक अधिक हैं। इससे एक दिन में मुश्किल से 30-40 प्रमाणपत्र ही बन पाते हैं। इस बारे में कर्मचारियों का कहना है कि सर्वर ठीक से काम नहीं कर रहा, जिससे प्रमाणपत्र जारी होने में समय लग रहा है।
Iजन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अभिभावकों की सुविधा के लिए कुर्सी रखवाई गई है, ताकि उन्हें कतार में खड़े होकर इंतजार न करना पड़े। किस वजह से महिलाएं जमीन पर बैठी थीं, इसकी जांच कराई जाएगी।
I
I
I
I
- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, प्रमुख अधीक्षक, डफरिन अस्पतालI