कार्यक्रम में डिप्टी सीएम व कुलपति।
लखनऊ। विषाक्तता के अनेक मामलों में डॉक्टरों को समय से सही जानकारी उपलब्ध न होने के कारण इलाज में देरी हो जाती है। इससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है, मगर केजीएमयू में जहर की पहचान व इलाज के लिए खुली खास तरह की लैब इस तरह के इलाज में बड़ी सहायक बनेगी।
ये बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहीं। वह शनिवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में टॉक्सोकॉन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने विश्लेषणात्मक विष विज्ञान प्रयोगशाला और विष सूचना केंद्र का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इस लैब के माध्यम से अब खून, मूत्र सहित अन्य जैविक नमूनों की तुरंत और सटीक जांच संभव हो सकेगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शरीर में कौन सा विष किस मात्रा में मौजूद है, जिससे चिकित्सकीय निर्णय अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक आधार पर लिए जा सकेंगे। इसके लिए आधुनिक उपकरण व तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि विषाक्तता का इलाज और फोरेंसिक मामलों में मदद मिल सके। दवा की सही खुराक भी तय की जा सकेगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केजीएमयू प्रदेश और देश का एक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान है। यहां होने वाला हर विकास केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे प्रदेश और देश को लाभ पहुंचाता है। जहर के शिकार लोगों की जिंदगी बचाने के लिए केजीएमयू ने अहम कदम उठाया है। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि फॉरेंसिक विभाग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। लोगों में विषाक्तता को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि विष सूचना केंद्र में लोगों को जहर संबंधी जानकारी मिल सकेगी। इस मौके पर फॉरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा, डीन डॉ. केके सिंह समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।