फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आवारा कुत्तों की आबादी पर लगाम लगाने का अभियान नाकाफी, बंध्याकरण के बाद भी बढ़ रहे छह गुना

Thu, 01 Oct 2020 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
- फोटो : ANI
विज्ञापन

आवारा कुत्तों से लखनऊवासी परेशान हैं। हालांकि, समस्या यह है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत इनको न पकड़कर रखा जा सकता है और न ही किसी दूसरी जगह छोड़ा जा सकता है। ऐसे में इनकी आबादी पर नियंत्रण करना ही विकल्प है। इसे लेकर नगर निगम का एनीमल बर्थ कंट्रोल अभियान तो चल रहा है, पर यह नाकाफी है।

विज्ञापन


अभी जितने कुत्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है, साल में उससे करीब छह गुना इनकी आबादी बढ़ जाती है। शहर में आवारा कुत्तों की तादाद के हिसाब से इनकी आबादी पर नियंत्रण करने में तीन साल से अधिक का समय लग जाएगा। आवारा कुत्तों की आबादी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए नगर निगम ने इंदिरानगर के जरहरा गांव में नया पशु चिकित्सालय खोला है।

इसका शुभारंभ करीब साल भर पहले किया गया और निजी संस्था ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल को इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई। यह संस्था ही शहर से आवारा कुत्तों को पकड़कर ले जाने और फिर उनका बंध्याकरण करने का काम करती है। इसके बाद उन्हें उसी इलाके में छोड़ने का काम भी संस्था करती है। शहर में आवारा कुत्तों की तादाद करीब 60 हजार मानी जा रही है। संस्था एक साल में करीब 20 हजार कुत्तों का ही बंध्याकरण कर पा रही है। ऐसे में सभी कुत्तों का बंध्याकरण करने में उसे करीब तीन साल का समय लगेेगा

विज्ञापन
विज्ञापन

रोजाना करीब 50 कुत्तों का बंध्याकरण

निजी संस्था की ओर से दी जा रही रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना करीब 50 कुत्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है। बंध्याकरण करने के बाद जब कुत्ते को छोड़ा जाता है तो उसके कान में एक निशान भी लगाया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि कुत्ते का बंध्याकरण हो चुका है।

दोगुनी की जाएगी क्षमता
संयुक्त निदेशक पशु कल्याण और नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद राव का कहना है कि जल्द ही बंध्याकरण की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। कुत्तों का रखने का एक और शेड बनने वाला है। उसके लिए शासन से पैसा भी आ गया है। शेड बनने के बाद रोजाना करीब 100 कुत्तों का बंध्याकरण होने लगेगा। 

हर साल एक लाख से अधिक  बढ़ रहे श्वान
डॉ. राव बताते हैं कि एक मादा श्वान साल में चार से छह पिल्ले देेती है, लेकिन इनमें से दो से ज्यादा जिंदा नहीं रह पाते। एक-दो तो पैदा होते ही मर जाते हैं तो कुछ एक-दो महीनों में दुर्घटनाओं व अन्य वजहों से दम तोड़ देते हैं। यदि शहर में 50 हजार ही मादा श्वान मानी जाएं तो हर साल एक लाख से अधिक नए श्वान बढ़ जाते हैं।
 
आवारा कुत्तों से परेशान हैं  तो करें फोन
9798199882
9889007366
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें