निजी संस्था की ओर से दी जा रही रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना करीब 50 कुत्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है। बंध्याकरण करने के बाद जब कुत्ते को छोड़ा जाता है तो उसके कान में एक निशान भी लगाया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि कुत्ते का बंध्याकरण हो चुका है।
दोगुनी की जाएगी क्षमता
संयुक्त निदेशक पशु कल्याण और नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद राव का कहना है कि जल्द ही बंध्याकरण की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। कुत्तों का रखने का एक और शेड बनने वाला है। उसके लिए शासन से पैसा भी आ गया है। शेड बनने के बाद रोजाना करीब 100 कुत्तों का बंध्याकरण होने लगेगा।
हर साल एक लाख से अधिक बढ़ रहे श्वान
डॉ. राव बताते हैं कि एक मादा श्वान साल में चार से छह पिल्ले देेती है, लेकिन इनमें से दो से ज्यादा जिंदा नहीं रह पाते। एक-दो तो पैदा होते ही मर जाते हैं तो कुछ एक-दो महीनों में दुर्घटनाओं व अन्य वजहों से दम तोड़ देते हैं। यदि शहर में 50 हजार ही मादा श्वान मानी जाएं तो हर साल एक लाख से अधिक नए श्वान बढ़ जाते हैं।
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