सुभाष बाबू सभा करके चले गए। अगले दिन सुबह जब गोरों ने लखनऊ की दीवारों पर चिपके बरतानिया हुकूमत को चुनौती देते और क्रांतिकारियों का आभार जताते लाल स्याही के इश्तिहार देखे तो वे बौखला गए। इश्तिहारों पर यह भी लिखा था, ‘अंग्रेजों सफल नहीं होगे। हिंदू-मुसलमान एक हैं।
बरतानिया हुकूमत जब तक कुछ समझती और इसे रोकने की कोशिश करती तब तक लखनऊ में जगह-जगह से हिंदू व मुसलमानों के जुलूस अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नारे लगाते हुए सड़कों पर आ गए। अंग्रेजों ने लाख कोशिश की कि लेकिन यह पता नहीं लगा पाए कि यह सब कैसे हुआ। लखनऊ में अंग्रेजों के खिलाफ जंग तेज होती गई।’