राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ‘बाबू जी’ विधानसभा अध्यक्ष थे। पर, वह नागरी लिपि, हिंदी भाषा और साहित्य का काम भी अपनी देखरेख में करवा रहे थे। उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन का गठन भी किया था। वह बड़े कद के ही नहीं बड़े भाव के भी थे।
वह दूसरों की काफी चिंता करते थे। प्रसंग छतरपुर में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मेलन का है। इसके आयोजक वरिष्ठ साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र थे। उन्होंने बाबू जी को सम्मेलन के उद्घाटन के लिए बुलाया। मिश्र के संस्मरण से पता चलता है, ‘बाबू जी छतरपुर पहुंचे। सम्मेलन का उद्घाटन हुआ।
शोभा यात्रा निकली। विश्राम के लिए वह गांधी भवन पहुंचे। मैं भी वहां पहुंचा ताकि उन्हें कोई कठिनाई न हो। मुझे देखते ही उन्होंने अपना झोला खोला और बोले, ‘तुम्हारे लिए लखनऊ से खरबूजा और दशहरी आम लाया हूं। इसे तुम अभी खा लो, नहीं तो तुम लोगों की व्यवस्था में भूखे ही रह जाओगे।’