हालांकि, किसी पार्षद की सदस्यता समाप्त करने के लिए शासन को सिफारिश का यह पहला मामला नहीं है लेकिन आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। करीब तीन साल पहले पेयजल व सीवर समस्या को लेकर अम्बेडकरनगर द्वितीय वार्ड के तत्कालीन पार्षद अजय अवस्थी ने लोगों के साथ जलकल महाप्रबंधक आरपी वर्मा और सचिव राघुवेंद्र कुमार को बंधक बनाकर उन्हें कुर्सी पर बैठाकर दुपट्टे से बांध दिया था।
मामले में पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और सदस्यता समाप्त करने को शासन पत्र भेजा गया था, पर हुआ कुछ नहीं। वहीं, चार साल पहले अधिकारियों से मारपीट, धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार के मामले में इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के सपा पार्षद रुद्र प्रताप सिंह और रफी अहमद किदवई वार्ड की भाजपा पार्षद मालती यादव की सदस्यता समाप्त करने के लिए शासन को पत्र भेजा था, मगर हुआ कुछ नहीं।
मालती के बेटे रामकृष्ण यादव (मौजूदा पार्षद) ने कर्मचारियों से मारपीट की थी। इसके अलावा करीब डेढ़ दशक पहले तत्कालीन सपा पार्षद मुजीबुर्रहमान बब्लू, रामनरेश वर्मा और मुकेश शुक्ला की सदस्यता समाप्त करने के लिए भी नगर निगम ने पत्र भेजा था। इन पार्षदों पर नगर आयुक्त कक्ष में मेज पलटने और अभद्रता करने का आरोप था। हालांकि, इनका भी कुछ नहीं हुआ था।
सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू ने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का हक है। पार्षद ने कार्रवाई का विरोध किया, न कोई मारपीट या पथराव। नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि वह पहले उन लोगों के कब्जे तोड़े, जिन्होंने करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। सबसे बड़ी बात तो यह है जब निर्माण हो रहा था तभी उसे क्यों नहीं रोका गया। उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।