आज भले ही कई संवैधानिक संस्थाओं की तरह राज्यपाल का पद भी कड़े सुरक्षा घेरे में आ गया है, पर आजादी के बाद के शुरुआती दिनों में ऐसा नहीं था। राज्यपाल या मुख्यमंत्री से मिलना आज जैसा मुश्किल नहीं था। विश्वनाथ दास प्रदेश के राज्यपाल थे।
इस नाते वह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी थे। विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. पं. हरिकृष्ण अवस्थी ने उनसे जुड़ा एक दिलचस्प संस्मरण लिखा है, एक बार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल विश्वनाथ दास को छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने जलपान पर आमंत्रित किया।
जलपान और भाषण के बाद विद्यार्थियों ने उनसे अपने साथ फोटो खिंचवाने का आग्रह किया। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। विद्यार्थी उन्हें लॉन के बीच लेकर जाने लगे। जैसे ही वे लॉन में पहुंचे तो वे बीच में अचानक खड़े हो गए।