भगवती चरण वर्मा वैसे तो कोमल हृदय थे, पर कभी-कभी बड़ा पैना मजाक कर बैठते थे। उनके समकालीन एक और साहित्यकार, कहानीकार व उपन्यासकार थे, भगवती प्रसाद वाजपेयी। साहित्यकार मंडली वाजपेयी को भप्रवा कहती थी।
उनकी जीविका सिर्फ कलम के सहारे थी। उन्होंने तीन सौ से अधिक कहानियां और दो दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे। उनके दो कन्याएं थीं। बड़ी कन्या के हाथ पीले करने के लिए पैसे के जुगाड़ में जब वह बंबई (मुंबई) गए तो वहीं उनकी मुलाकात भगवती बाबू से हो गई।
वाजपेयी जी उन दिनों बंबई के विष्णु सिनेटोन में स्टोरी और डायलॉग राइटर की हैसियत से काम कर रहे थे। इन लोगों की रोज शाम को चौकड़ी जमा करती थी, जिसमें अमृतलाल नागर भी शामिल रहते थे। वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानचंद जैन ने एक संस्मरण में लिखा है, ‘एक दिन भगवती बाबू ने वाजपेयी जी पर फिकरेबाजी कसी, ‘आप हिंदी साहित्य के सबसे बड़े हत्यारे हैं।’