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‘लड़कियां उठा लेते थे, रेप करके 4 दिन बाद लौटाते थे’

Wed, 04 Jun 2014 06:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बदायूं में दो लड़कियों से दुराचार का मामला मीडिया में आया तो दुनिया जाग गई, अन्यथा ऐसी भयावह कहानियां वहां रोज की हैं।
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संयुक्त राष्ट्र संघ तक को झकझोर कर बयान देने के लिए मजबूर कर देने वाले बदायूं दोहरे दुराचार व हत्याकांड को लेकर लखनऊ के कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मामले से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्यों को साझा किया।

साझी दुनिया से जुड़ी डॉ. रूपरेखा वर्मा ने बताया कि इन क्षेत्रों में जाति विशेष के लोग अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अन्य जातियों की लड़कियों से दुराचार कर रहे हैं।
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साथ ही वे अन्य जातियों के खेतों पर रंगदारी वसूलते हैं, न देने पर खड़ी फसल जला देना, घर के बच्चों और युवाओं को पीटना, आदि आम बात है। कमजोर दलित जातियां इन हालात को बस सह जाती हैं, क्योंकि पुलिस भी रिपोर्ट नहीं लिखती।

ये रहे भयावह तथ्य

‘बदायूं में दो लड़कियों से दुराचार कर उन्हें फांसी पर लटकाना एक मामला है जो मीडिया की वजह से सामने आया।

इस क्षेत्र में दलितों की बेटियों को क्षेत्र के गुंडों द्वारा उठा ले जाने और 3-4 दिन तक दुराचार करने के बाद परिवार को लौटाना एक प्रथा जैसा बन चुका था।

यह मामला सामने आने के बाद भी घटना रुकी नहीं हैं। सिर्फ कटरा सआदतगंज में हमारे सामने 4 मामले और आए थे, जिनमें लड़कियों को अगवा करके उनसे दुराचार किया गया और कुछ दिन बाद परिवार को लौटाया गया।

इन परिवारों को मालूम होता है कि उनकी बेटी कहां है, किस घर में है लेकिन गुंडों के पास बंदूकें होती हैं और पुलिस का साथ भी। पीड़ित परिवार अपनी नियति मानकर घर की बच्चियों के लौटने का इंतजार करते हैं।’

पुलिस भी मिल जाती है गुंडों के साथ

इस मामले में मृतकाओं का पिता एक छोटे किसान है, जिसकी आरोपियों से कोई दुश्मनी नहीं थी।

अंधेरे में शौच के लिए उसके खेत पर जा रही बेटियों को गुंडों ने उठा लिया, उनका चाचा बचाने आया तो उसे बंदूक के बट से पीटकर अधमरा कर दिया गया।

दोनों बच्चियों को गांव के बीच में स्थित अपने घर में गुंडे ले गए जो पीड़ित परिवार के घर से सिर्फ आधा किमी दूर था।

परिवार को मालूम था कि उसकी बेटियां कहां हैं, लेकिन वे उस घर में पुलिस के सहयोग के बिना दाखिल नहीं हो सकते थे। पुलिस ने गुंडों का साथ दिया, दुराचार भी किया।
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मार दोगो तो सम्मान से जेल जाओगे

बदायूं गई टीम में शामिल हमसफर संस्था की नीतू, आली की शिवांगिनी, एक्शन एड के राजन सिंह, रामदुलार, रामकुमार आदि ने बताया कि दुराचार के बाद पुलिस ने गुंडे आरोपियों को बच्चियों को मारने के लिए उकसाया था।

आरोपियों से कहा गया कि अगर वे दुराचार करके जेल गए तो यह उनके परिवार के लिए ही शर्म की बात होगी लेकिन हत्या करके जेल जाएंगे तो सम्मान की बात होगी।
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