उसे मिली थी शरीर में रीढ़ हड्डी की पैदाइशी विकृति जिसने कदम-दर-कदम उसे मजबूर बनाने का फैसला सुनाया लेकिन डर के आगे जीत का जज्बा उसने खुद से पैदा किया। लड़खड़ाते कदमों पर चलने के बजाय स्पाइनल सर्जरी की असहनीय पीड़ा को चुना और पिछले दिनों मिस यूपी वोग फैशन शो के रैंप पर चलकर लोगों का इस कदर दिल जीता कि उपविजेता का ताज भी पहन लिया।
यह कहानी है इंदिरानगर की सुजाता चौधरी की जो खुद डॉक्टर बनने की राह पर हैं लेकिन दूसरों को सिखा रही हैं कि अपने जीवन का एवरेस्ट तो खुद ही पार करना होगा।
इंदिरा नगर के स्प्रिंग डेल स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली सुजाता को जीवन के शुरुआती दिनों में कभी पता तक नहीं चला कि वह किसी ऐसी बीमारी की चपेट में है जो उसे मजबूर जीवन की राह पर धकेल रही है। सुजाता बताती हैं कि वह 2009 का साल था जब उन्हें रीढ़ की हड्डी में असहनीय दर्द का अहसास हुआ।
डॉक्टरों ने जन्म से स्पोंडिलोप्टोसिस केस बताया तो निराशा का भंवर जाल उन्हें चारों ओर दिखाई देने लगा। इस हाल से वह जल्द ही बाहर निकलीं और जनवरी 2014 इंडियन स्पाइनल इंजरीस सेंटर (आईएसआईसी) के डॉ विकास टंडन से मिलीं।
जटिल और पीड़ादायक डेलीकेट स्पाइनल सर्जरी कराई लेकिन इसके बाद बाइलेटरल फुट ड्रॉप की समस्या हो गई जिसमें दोनों पैर बराबर जमीन पर नहीं पड़ते। डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या भी ताउम्र रहनी थी लेकिन जैसे पुरुषार्थ से भाग्य बदलता है तो सुजाता ने भी अपनी दृढ़ संकल्पशक्ति से असंभव को संभव कर दिखाया और दो साल के अंदर रैंप पर चलकर बतौर मॉडल अपनी श्रेष्ठता का झंडा बुलंद कर डाला।
दंत चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने में जुटी सुजाता ने बातचीत में कहा कि मॉडलिंग मेरा पैशन है। मजबूर के तौर पर खुद की पहचान मुझे सख्त नापसंद है इसलिए मैंने हर उस चुनौती को स्वीकार किया जो मुझे कमजोर बना सकती है।