नरेंद्र मोदी खुद को देश का चौकीदार बताते हैं, लेकिन पिछले दिनों हुए उपचुनाव में एक असली चौकीदार जनता का प्रतिनिधि बनकर सामने आया है।
बलहा के उपचुनाव के मैदान में भाजपा को धोबी पछाड़ दांव से पटखनी देने वाले बंशीधर की जिंदगी संघर्षों की कहानी है। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने सेंट्रल स्टेट फार्म की चौकीदारी की।
साइकिल का पंक्चर बनाया। पहलवानी का दांवपेंच सीखकर अखाड़े में भी भाग्य आजमाया। लेकिन राजनीति में अंतत: भाग्य का सितारा चमक उठा।
बंशीधर भी मानते हैं कि विधायक बनने का वह सपना देखते थे, लेकिन यह सपना सच होगा, इसकी उम्मीद बहुत कम थी।
बहनजी का छोड़ा साथ, बदला भाग्य
बलहा उपचुनाव के नव निर्वाचित विधायक बंशीधर के चुनाव जीतने के बाद गांव और गलियों में चुनाव परिणाम की चर्चा हो रही है। माह भर पूर्व बसपा के काडर की राजनीति करने वाले बंशीधर के पार्टी बदलते ही उनकी भाग्य ने भी पलटा खाया और बंशीधर फर्श से अर्श पर पहुंच गए।
विधायक निर्वाचित होने के बाद बंशीधर के अतीत को कुरेदा गया तो उन्होंने बताया कि वह मूलत: बलिया जिले के निवासी हैं। चार दशक पूर्व बाबा परिवार समेत गिरिजापुरी के निकट हनुमान गढ़ी गांव में आकर बसे थे। लेकिन 80 के दशक में आयी बाढ़ में पूरा गांव बह गया।
गांव के पांच हजार बाशिंदे इधर-उधर बिखर गये। उसी बाढ़ के बाद कुड़कुड़ी कुंआ टेड़िया नईबस्ती गांव में उन्होंने आशियाना बनाया। माननीय का दर्जा पा चुके बंशीधर बताते हैं कि खेती काफी लंबी है, लेकिन अधिकांश खेत घाघरा की कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। कुछ खेत जंगल के किनारे है। उसे हाथी व अन्य वन्यजीव आए दिन नष्ट कर देते हैं।
चौकीदार से पंचर बनाने तक
ऐसे में घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने सेंट्रल स्टेट फार्म में चौकीदारी की नौकरी की थी, लेकिन दशक भर पूर्व सेंट्रल स्टेट फार्म बंद होने पर नौकरी भी खत्म हो गई।
हालांकि, यह नौकरी दिहाड़ी की थी फिर भी प्रतिमाह दो हजार रुपये के आसपास मिल जाते थे। स्टेट फार्म बंद होने पर उन्होंने स्टेट फार्म के गेट पर ही साइकिल का पंक्चर बनाकर घर का खर्च चलाया।
बंशीधर बताते हैं कि वर्ष 2000 में बसपा की राजनीति करते हुए जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाग्य अजमाया। किस्मत ने साथ दिया और पंचायत सदस्य चुने गए।
2005 में पुन: बंशीधर पंचायत सदस्य चयनित हुए और इसी के बाद उन्होंने विधायक बनने का सपना देखा। बंशीधर का कहना है कि यह सपना इतनी जल्दी सच होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। लेकिन ऊपर वाले पर भरोसा था कि किसी न किसी दिन किस्मत जरूर पलटेगी। इसके लिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का वे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
पहली बार कोई वन ग्रामीण पहुंचा सदन
बंशीधर ने बताया कि उन्होंने जब्बार पहलवान से पहलवानी के दांव पेंच सीखे थे। बचपन से ही पहलवानी के प्रति काफी लगाव रहा। इसके चलते अखाड़े में भी कई बार दांव अजमाया। गोंडा और लखीमपुर जिले में होने वाली कुश्तियों में भी आधे दशक पहले बंशीधर अखाड़े में पहलवानों को पटखनी दे चुके हैं।
नव निर्वाचित विधायक बंशीधर के नजदीकी जंग हिंदुस्तानी ने बताया कि बंशीधर के बड़े भाई शुभंत को लोक गायन में महारत हासिल है। वह रमपुरवा मटेही में परिवार समेत रहते हैं, जबकि छोटे भाई बिहारीपुर में रह रहे हैं। यह परिवार तभी बिखरे जब 80 के दशक में बाढ़ ने तबाही मचायी।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में आठ वन गांव हैं। अभी तक यहां के वन ग्रामीण हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे। मताधिकार के लिए दशक भर पहले तक सभी को सड़क पर भी उतरना पड़ा था। वन ग्राम के निवासी समाजसेवी जंग हिंदुस्तानी बताते हैं कि मताधिकार मिलने के बाद यह पहला मौका है, जब वन ग्राम का कोई व्यक्ति विधानसभा में पहुंचा है।