प्रदेश के दो विभागों में सचिव और विशेष सचिवों की स्थिति ऐसी है कि विभाग में होने वाले तबादलों की जानकारी, उन्हें उनके पीए या फिर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से मिलती है।
जब कोई उनका मीडिया से जुड़ा हुआ मित्र ट्रांसफर या फिर प्रमोशन के बारे में पूछता है, तो अक्सर जवाब मिलता है कि मालूम नहीं, थोड़ी देर में पूछ कर बताता हूं।
या फिर अगर आपको कोई जानकारी मिले तो मुझे भी बता देना। एक हाकिम का विभाग कानून-व्यवस्था से तो दूसरे का अफसरों और कर्मचारियों को इधर-उधर करने से जुड़ा है।
हालात ये हैं कि आदेश की प्रति भी इन अफसरों को नहीं मिलती है। हाल ही में हुए कुछ तबादलों के बारे में मीडिया के मित्रों ने पूछा तो जवाब मिला कि मुझे जानकारी नहीं है।
मीडिया वाले थे सो सवाल पूछने से नहीं चूके। क्या सही में आपको जानकारी नहीं है आप तो सचिव हैं। सवाल जायज था। लेकिन उधर से जवाब मिला कि मैं ही क्या कभी-कभार तो प्रमुख सचिव को भी जानकारी नहीं होती है।