यह बहुत पुरानी कहावत है कि गुरु गुड़ रहे और चेला शक्कर हो गया। यह कहावत आज भी हकीकत में बदलते हुए दिखाई पड़ जाती है।
अभी हाल ही में राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन करते हुए इसका अध्यक्ष नामित किया गया है। अध्यक्ष उसे बनाया गया जो कभी खांटी सपाई और सफाई नेता के इशारे पर चलता था और चेलाही करते नहीं थकता था।
पर खां साहब की इस खांटी सपाई पर नजरें तिरछी क्या हुईं, चेले ने पलटी मार दी और खां साहब की जी हुजूरी में लग गया। सफाई कर्मचारी जब आंदोलन कर रहे थे, तो यह आंदोलन खत्म कराने में लग गया।
खां साहब से लेकर प्रमुख सचिव तक से मिले और कहा कि उनका संगठन आंदोलन से अलग है। इसका रिजल्ट भी मिला। चेलाही करते-करते उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला गया। अब चेले की बल्ले-बल्ले है।
लालबत्ती का जलवा हर तरफ महोदय दिखाने को बेताब हैं। गुरु आज भी उसी कमरे में बैठ कर सफाई कर्मचारियों की समस्याएं सुनते हैं और हाथ से अप्लीकेशन लिखकर हक दिलाने के लिए दिनभर भागमभाग किया करते हैं।