लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यावहारिक अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. बिमल जायसवाल ने कहा कि उन पर तथ्यों को छुपाकर नौकरी हासिल करने के लगाए गए आरोप निराधार हैं। शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय के गोपनीय दस्तावेज चोरी कर उनके खिलाफ झूठी शिकायत की थी। जिस पर शासन ने उनके खिलाफ जांच समिति गठित की थी। उच्च न्यायालय ने उसे रद कर दिया है।
प्रो. बिमल ने शुक्रवार को लविवि में स्थित अपने कमरे में पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि शिकायत में उनके पिता की जो आमदनी दिखाई गई है, वो वेतन से होने वाली आमदनी है, जबकि क्रीमीलेयर में वेतन नहीं जोड़ा जाता। इसलिए वह नॉन क्रीमीलेयर में ही आते हैं। शिकायत में उनपर नियुक्ति में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया, जबकि नियुक्ति की किसी भी प्रक्रिया का वह कभी हिस्सा नहीं रहे। रिसर्च स्कॉलरों के उत्पीड़न का आरोप की आज तक कोई शिकायत नहीं हुई। ऐसे में सब साजिश है।