बोन एवं टिश्यू बैंक का शुभारंभ करतीं कुलपति।
लखनऊ। केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में सोमवार को प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक स्थापित किया गया। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इसका शुभारंभ किया। अब जटिल हड्डी और टिश्यू संबंधी सर्जरी के लिए मरीजों को प्रदेश में ही उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्ट मिलेंगे। संस्थान ने लाइसेंस के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग में आवेदन किया है, जिसकी मंजूरी जल्द मिलने की उम्मीद है।
कुलपति ने बताया कि यह बैंक लिंब सेंटर के चौथे तल पर सवा करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुआ है। यहां मरीजों को सुरक्षित बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट मिलेंगे। यह चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और टिश्यू डोनेशन को नई दिशा देगा। वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित एलोग्राफ्ट से अतिरिक्त हड्डी निकालने की जरूरत कम होगी। इससे चीरा, दर्द, रक्तस्राव और डोनर साइट की जटिलताएं घटेंगी। जटिल ऑपरेशन की सफलता और मरीजों का पुनर्वास बेहतर होगा।
ये है इसका लाभ
हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि बैंक हड्डी, लिगामेंट और अन्य मस्कुलोस्केलेटल टिश्यू का वैज्ञानिक संग्रह, प्रोसेसिंग और संरक्षण करेगा। इसका लाभ जटिल फ्रैक्चर, बड़े बोन डिफेक्ट, बोन ट्यूमर और स्पाइन जैसी कई सर्जरी में मिलेगा। यह सुविधा प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी और ऑन्कोलॉजी सहित कई विभागों के मरीजों को भी मिलेगी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी राहत मिलेगी।
मरीजों की सुरक्षा रहेगी सुरक्षित
बोन एवं टिश्यू बैंक में क्लीन रूम, स्टराइल प्रोसेसिंग यूनिट और डीप फ्रीजर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं हैं। बैंक के इंचार्ज कुमार शांतनु ने बताया कि इसे राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। हर ग्राफ्ट को अलग पहचान संख्या और पूरा रिकॉर्ड दिया जाएगा, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भारत में पहला बोन बैंक वर्ष 1988 में मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में स्थापित हुआ था। केजीएमयू ने यह बैंक विकसित कर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में नया अध्याय जोड़ा है।