जानकार बताते हैं कि मंदी का असर बजट पर साफ-साफ पड़ा है। केंद्र की 2019-20 की केंद्रीय करों की प्राप्तियों का पुनरीक्षित अनुमान इसका प्रमाण है। अनुमान के हिसाब से राजस्व न आने से केंद्रीय करों की राशि कम हुई है जिससे राज्यों का आवंटन पहले से भी कम हो गया है।
केंद्र ने 2019-20 के बजट में 14वें वित्त आयोग के फॉर्मूले पर केंद्रीय करों में यूपी की हिस्सेदारी 1,45,312.19 करोड़ लगाई गई थी। लेकिन, 2020-21 के बजट में 2019-20 के प्रस्तावित आवंटन का अनुमान खरा नहीं उतरा।
इसे पुनरीक्षित कर 1,17,818.30 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बजट अनुमान से 27,493.89 करोड़ रुपये कम है। 2018-19 में प्रदेश को 1,32,345 करोड़ रुपये वास्तविक रूप से मिले थे। पुनरीक्षित आवंटन इससे भी कम है।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने का असर प्रदेश सरकार की ओर से संचालित योजनाओं, परियोजनाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है। प्रदेश को वेतन, भत्ते व अन्य आवश्यक खर्चे जैसे वचनबद्ध खर्च करने ही है।
इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं व परियोजनाओं में राज्यांश देने की वचनबद्धता है। ऐसे में केंद्रीय करों में आवंटन का अनुमान घटने पर यदि प्रदेश सरकार ने अपनी प्राप्तियां बढ़ाने की योजना पर तत्काल कुछ नए कदम नहीं उठाए तो बजट घाटा भी बढ़ने का खतरा है।