सूत्रों के मुताबिक, स्टेट इंटेलिजेंस अन्य कल्याणकारी विभागों में भी भ्रष्टाचार के मामलों में जरूरी तथ्य इकट्ठा कर रही है। इंटेलिजेंस के एक इंस्पेक्टर ने बताया कि ऐसी जानकारियां इकट्ठा करने के निर्देश उच्च स्तर से मिले हैं।
ये जानकारियां रिपोर्ट की शक्ल में शासन के साथ शेयर की जाएंगी, ताकि संबंधित मामलों में उचित और ठोस निर्णय लिए जा सकें। संबंधित विभागों के अलावा अन्य जिस भी माध्यम से जरूरी इनपुट मिल सकता है, उसे भी इंटेलिजेंस जुटा रही है।
खुफिया निरीक्षकों से कहा गया है कि अगर मुख्यालय स्तर के भ्रष्टाचार के तार जिले स्तर से जुड़े हुए हैं, तो वहां से भी तथ्य इकट्ठा किए जाएं। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस नीति' से जोड़कर देखा है।
जानकार बताते हैं कि हाल ही में पीडब्ल्यूडी और वित्त विभाग समेत कई विभागों में अधिकारियों की बर्खास्तगी और अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई में भी खुफिया इनपुट का काफी योगदान रहा। आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाई में खुफिया इनपुट को शामिल कर विचार किया जाएगा।