केंद्रीय कर्मियों की तरह मकान किराया भत्ता, कैशलेस इलाज, नियमित भर्ती समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत राज्य कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन बुधवार को ज्यादातर दफ्तरों में कामकाज ठप रहा।
अस्पतालों के कर्मचारी व नर्सों ने सुबह तीन घंटे तक काम नहीं किया जिससे मरीजों को काफी दिक्कतें हुईं। रजिस्ट्री कार्यालय, आरटीओ, वाणिज्य कर में भी कामकाज नहीं हुआ। व्यापारियों को फॉर्म 38 न मिलने से परेशानी हुई तो आरटीओ दफ्तर का काम प्रभावित होने से करों की अदायगी व जुर्माना अदायगी नहीं हो पाई।
ट्रेजरी में भी लेनदेन प्रभावित रहा। हड़ताल के पहले दिन ही लगभग 800 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी हड़ताल के 80 प्रतिशत सफल रहने का दावा किया है। साथ ही कहा है कि अगले दो दिनों में इसका और प्रभाव बढ़ेगा।
कहां कितने का काम प्रभावित
रजिस्ट्री दफ्तर--100 करोड़ रुपये
आरटीओ दफ्तरों--90 करोड़ रुपये
आबकारी--100 करोड़ रुपये
वाणिज्य कर--300 करोड़ रुपये
राजस्व वसूली--90 करोड़ रुपये
कर्मचारियों का ऐलान और बढ़ेगा हड़ताल का दायरा
राजधानी में हालांकि जवाहर भवन और इंदिरा भवन कर्मचारी संघ के हड़ताल में शामिल न होने से कई दफ्तर खुले रहे।
पर, अन्य स्थानों विकास भवन, लोक निर्माण, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, उद्यान, खाद्य-रसद कार्यालयों, बांट-माप विभाग, शिक्षा भवन, अर्थ एवं संख्या, योजना भवन, विकासदीप समाज कल्याण, श्रम, कृषि, सहकारिता विभाग, मातृ-शिशु कल्याण सहित तमाम विभागों में कामकाज काफी प्रभावित रहा।